Indian Stock Market Correction: भारतीय शेयर बाजार में जारी कमजोरी अब केवल बेंचमार्क इंडेक्स तक सीमित नहीं रही है। बड़ी संख्या में कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब एक तिहाई यानी लगभग 33% लिस्टेड कंपनियों के शेयर अपने उच्चतम स्तर से आधे से भी ज्यादा गिर चुके हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में गिरावट अब व्यापक स्तर पर फैल चुकी है और निवेशकों की संपत्ति पर इसका बड़ा असर पड़ा है।
मिड और स्मॉलकैप पर ज्यादा दबाव
गिरावट का सबसे ज्यादा असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में देखने को मिल रहा है। इन सेगमेंट में कई कंपनियों के शेयर अपने पीक से 40% से 60% तक टूट चुके हैं। व्यापक बाजार में आई इस कमजोरी ने बाजार की चौड़ाई को भी कमजोर किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि गिरावट केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है बल्कि बड़ी संख्या में कंपनियां दबाव में हैं।
| सेगमेंट | गिरावट की स्थिति | स्थिति का संकेत |
|---|---|---|
| कुल लिस्टेड शेयर | करीब 33% शेयर पीक से 50% से ज्यादा नीचे | बाजार में गहरा करेक्शन |
| स्मॉलकैप शेयर | बड़ी संख्या में 50% से ज्यादा गिरावट | सबसे ज्यादा दबाव |
| मिडकैप शेयर | कई शेयर 40–60% तक टूटे | व्यापक कमजोरी |
| निफ्टी 50 | लगभग 9–10% गिरावट (2026 में अब तक) | बड़े शेयरों में सीमित गिरावट |
| सेंसेक्स | करीब 10–11% गिरावट | ब्लूचिप शेयर अपेक्षाकृत मजबूत |
| ब्रॉडर मार्केट | बड़ी संख्या में शेयर 30–60% तक नीचे | मार्केट ब्रेड्थ कमजोर |
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
बाजार में कमजोरी की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही है। इस साल की शुरुआत से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार में काफी बिकवाली की है, जिससे बाजार में दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही कॉर्पोरेट नतीजों की धीमी रफ्तार और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर भी निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है।
वैश्विक अनिश्चितता ने बढ़ाया दबाव
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। तेल की कीमतों में उछाल भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि इससे महंगाई और करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार के लिए क्या संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि जब बड़ी संख्या में शेयर अपने ऑल टाइम हाई से 50% से ज्यादा गिर जाते हैं तो यह अक्सर बाजार में गहरे करेक्शन का संकेत होता है। हालांकि ऐसे दौर में कई मजबूत कंपनियों के शेयर भी सस्ते वैल्यूएशन पर उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकते हैं।
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