NCLAT ने बिल्डर और बायर्स के हक में बड़ा फैसला दिया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) ने कहा है कि रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ शुरू की गई कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) केवल उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहनी चाहिए जिसमें चूक (डिफॉल्ट) हुई है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया है कि इसे कॉरपोरेट देनदार की अन्य प्रोजेक्ट तक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। इस फैसले से एक प्रोजेक्ट की गलती की सजा पूरी कंपनी को नहीं मिलेगी और दूसरे प्रोजेक्ट का काम बिना किसी परेशानी से पूरा हो पाएगा। इससे होम बायर्स और बिल्डर दोनों को फायदा मिलेगा।
घर खरीदारों के लिए राहत की खबर
न्यायाधिकरण ने कहा कि किसी रियल एस्टेट कंपनी की सभी प्रोजेक्ट को दिवाला कार्रवाई के तहत लाना न तो चूक वाली प्रोजेक्ट के घर-खरीदारों और न ही अन्य प्रोजेक्ट के हितधारकों के हित में है। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि अगर किसी विशेष परियोजना के घर के खरीदार धारा सात के तहत आवेदन करते हैं, तो सीआईआरपी उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी। एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने यह फैसला नवीन एम रहेजा की अपील पर सुनाया है।
चेयरपर्सन न्यायमूर्ति अशोक भूषण और सदस्य (तकनीकी) बरुण मित्रा की एनसीएलएटी की पीठ ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं जो संबंधित मामले से जुड़ी नहीं हैं, उनको सीआईआरपी में शामिल करना घर खरीदारों और अन्य हितधारकों के हित में नहीं है। पीठ ने स्पष्ट किया कि कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया संबंधित परियोजना तक सीमित रहनी चाहिए। एनसीएलएटी ने पिछले महीने रहेजा डेवलपर्स की एक अन्य प्रोजेक्ट पर आदेश पारित करते हुए यह व्यवस्था दी थी कि सीआईआरपी सिर्फ एक परियोजना ’रहेजा शिलास’ तक सीमित रहेगी।
गेम-चेंजर साबित होगा यह फैसला
दिग्गज रियल एस्टेट डेवलपर्स और अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव ने कहा कि एनसीएलटी का यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। अब तक एक प्रोजेक्ट की चूक पूरी कंपनी को ले डूबती थी, जिससे हजारों निर्दोष घर खरीदार फंस जाते थे। 'प्रोजेक्ट-स्पेसिफिक इनसॉल्वेंसी' का यह सिद्धांत न केवल बिल्डरों को काम पूरा करने का मौका देगा, बल्कि उन बायर्स की गाढ़ी कमाई को भी सुरक्षित करेगा जिनका उस विवाद से कोई लेना-देना नहीं था।
अब किसी एक प्रोजेक्ट में डिफॉल्ट होने पर पूरी कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में घसीटने की बजाय कार्रवाई सिर्फ उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी। इससे न सिर्फ दूसरे प्रोजेक्ट्स का काम बिना रुकावट जारी रहेगा, बल्कि होम बायर्स का भरोसा भी मजबूत होगा। साथ ही, डेवलपर्स को भी राहत मिलेगी क्योंकि उनकी बाकी परियोजनाएं प्रभावित नहीं होंगी। कुल मिलाकर यह फैसला सेक्टर में संतुलन और स्थिरता लाने की दिशा में बड़ा कदम है।
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