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ट्रंप को टैरिफ के मोर्चे पर बड़ा झटका, अरबों डॉलर लौटाएगा अमेरिका, भारत को कितना फायदा?

ट्रंप के समय स्टील, एल्युमीनियम और कई अन्य उत्पादों पर 'सेक्शन 301' के तहत भारी टैरिफ लगाए गए थे। अगर भारतीय कंपनियां इस रिफंड के दायरे में आती हैं, तो उनके पास भारी मात्रा में कैश वापस आएगा।

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डोनाल्ड ट्रंप

एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है 'चौबे गए थे छब्बे बनने, दूबे बनके लौटे'। इस कहावत का अर्थ है कि अधिक लाभ की लालसा में व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति से भी हाथ धो बैठता है और हालात पहले से बदतर हो जाते हैं। यह कहावत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बिल्कुल फिट बैठता है। राष्ट्रपति का पद संभालते ही ट्रंप ने दुनियाभर के देशों पर अनाप-शनाप टैक्स लगाया। इससे पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई। कई देशों ने अमेरिकी दबाब में एकतरफा ट्रेड डील भी किए लेकिन अब यह पूरा फैसला ट्रंप के लिए सेल्फ गोल्फ साबित हो रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को गलत बताते हुए रद्द करने का फैसला सुनाया थ्ज्ञा। इसके बाद अब अमेरिकी सरकार दुनियाभर के देशों को टैरिफ के तहत वसूले गए पैसे को लौटाने का ऐलाना किया है।

अमेरिकी सरकार ने पैसा लौटाने की प्रक्रिया शुरू की

अमेरिकी सरकार ने अरबों डॉलर के टैरिफ वापस करने की एक लंबे समय से इंतजा की जा रही प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। यह कदम तब उठाया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए शुल्कों को रद्द कर दिया था।

US Customs and Border Protection (CBP) द्वारा लॉन्च किए गए एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आयातक सोमवार सुबह से ही अपने दावे (claims) फाइल करना शुरू कर सकते हैं। यह प्रक्रिया अमेरिका के इतिहास में टैरिफ वापसी का अब तक का सबसे बड़ा अभियान साबित हो सकती है।

रिफंड का दावा कौन कर सकता है?

आयातकर्ता और अधिकृत कस्टम ब्रोकर, जिन्होंने आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ का भुगतान किया था, अब CBP सिस्टम के माध्यम से अपने दावे जमा कर सकते हैं। लेकिन पहले चरण में पात्रता सीमित है। Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरू में केवल कुछ "अनलिक्विडेटेड" (unliquidated) एंट्रीज, या वे एंट्रीज जो अंतिम अकाउंटिंग के 80 दिनों के भीतर आती हैं, ही इसके लिए पात्र होंगी।

CBP (कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन) के रिकॉर्ड के अनुसार, 3.3 लाख से अधिक आयातकों ने 5.3 करोड़ से ज्यादा शिपमेंट्स पर करीब 166 अरब डॉलर का शुल्क (ड्यूटी) चुकाया। हालांकि, अप्रैल के मध्य तक केवल लगभग 56,500 आयातकों ने ही इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पूरा किया था।

रिफंड क्यों दिया जा रहा है?

20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 6–3 के फैसले में कहा कि ट्रंप ने 1977 के इमरजेंसी कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाकर अपनी सीमा से अधिक अधिकार का उपयोग किया। इसके बाद US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने प्रभावित कंपनियों को रिफंड का हकदार माना।

क्या आम उपभोक्ताओं को पैसा मिलेगा?

जरूरी नहीं। टैरिफ आयातक कंपनियां भरती हैं, जो अक्सर इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं। मौजूदा सिस्टम में रिफंड कंपनियों को मिलेगा और वे इसे ग्राहकों को लौटाने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि, कुछ कंपनियों ने ग्राहकों को पैसा लौटाने का संकेत दिया है।

भारत को कितना फायदा?

ट्रंप ने टैरिफ के नाम पर जो दुनियाभर के देशों से करीब 175 अरब डॉलर वसूले हैं। भारतीय निर्यातकों से भारी वसूली की गई है। अब उनको ये पैसे मिलेंगे, जिससे निर्यातकों को घाटा पाटने में मदद मिलेगी।

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Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभ... और देखें

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