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LPG vs PNG : कौन सा किचन फ्यूल है ज्यादा सुरक्षित,दोनों में क्या है फर्क?

घरेलू रसोई के लिए एलपीजी और पीएनजी में कौन सा विकल्प बेहतर है। इन दोनों में बुनियादी फर्क क्या है? आइए समझते हैं...

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एलपीजी और पीएनजी में कौन सी गैस है बेहतर। (फोटो- टाइम्स नाउ)

LPG vs PNG: which kitchen fuel is safer? मध्य पूर्व में 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुई जंग ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। हर बीतते दिन के साथ इसका प्रसार क्षेत्र बढ़ता ही जा रहा है। इस जंग के कारण ही वैश्विक रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन बिगड़ गई है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है।एलपीजी गैस की किल्लत के कारण भारत में भी हालात बदतर हो गए हैं, लोग गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें लगाने पर मजबूर हो गए हैं। वहीं सरकार पीएनजी पर शिफ्ट होने की सलाह दे रही है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि एलपीजी और पाइपलाइन वाली पीएनी में कौन सी गैस ज्यादा खतरनाक है और किससे आग लगने का खतरा रहता है...

दोनों में क्या है अंतर?

एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) और पीएनजी (Piped Natural Gas) दोनों ही घरेलू ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती हैं, लेकिन इनकी संरचना, सप्लाई सिस्टम और सुरक्षा के पहलू एक-दूसरे से काफी अलग हैं। एलपीजी दरअसल प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होती है,जिसे उच्च दबाव में तरल रूप में सिलेंडर में भरा जाता है। इसके विपरीत, पीएनजी मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है,जो पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाई जाती है।

इन दोनों गैसों के बीच सबसे अहम अंतर इनके घनत्व (density) का है। एलपीजी हवा से भारी होती है,जबकि पीएनजी हल्की होती है। यही फर्क किसी भी गैस लीकेज की स्थिति में इनके व्यवहार को पूरी तरह बदल देता है और सुरक्षा के स्तर को प्रभावित करता है।

आग और विस्फोट का जोखिम

एलपीजी के साथ सबसे बड़ा खतरा इसके भारी होने से जुड़ा है। अगर रसोई में कहीं गैस लीक हो जाए,तो यह ऊपर उठने के बजाय नीचे की सतह पर जमा हो जाती है। फर्श या बंद जगह में इकट्ठा होने के कारण यह जल्दी बाहर नहीं निकलती और मामूली चिंगारी-जैसे स्विच ऑन करना या आग जलाना भी बड़े विस्फोट का कारण बन सकती है। यही वजह है कि एलपीजी से जुड़े हादसे अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिलते हैं।

पीएनजी क्यों मानी जाती है सुरक्षित?

पीएनजी का व्यवहार इससे बिल्कुल अलग होता है। यह हवा से हल्की होने के कारण रिसाव की स्थिति में तेजी से ऊपर उठती है और खिड़कियों या वेंटिलेशन के जरिए बाहर निकल जाती है। इससे कमरे में गैस जमा नहीं हो पाती और विस्फोट की संभावना काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि शहरी क्षेत्रों में पीएनजी को अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

दोनों का सप्लाई सिस्टम और सुरक्षा फीचर्स

एलपीजी सिलेंडर में गैस उच्च दबाव पर भरी जाती है,इसलिए रेगुलेटर,पाइप या वाल्व में खराबी होने पर खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर,पीएनजी का वितरण नेटवर्क तकनीकी रूप से ज्यादा उन्नत होता है। इसमें ऑटोमैटिक कट-ऑफ सिस्टम, प्रेशर कंट्रोल और लीकेज डिटेक्शन जैसी सुविधाएं होती हैं,जिससे किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में गैस सप्लाई तुरंत रोकी जा सकती है।

रिसाव की स्थिति में क्या करें?

एलपीजी लीक होने पर खास सावधानी जरूरी होती है-बिजली के स्विच का इस्तेमाल, माचिस जलाना या किसी भी तरह की चिंगारी पैदा करना बेहद खतरनाक हो सकता है। वहीं,पीएनजी में जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है,लेकिन सतर्कता यहां भी जरूरी है।

ऐसे में अब दोनों गैसों की समीक्षा के बाद यह सामने आया है कि एलपीजी की तुलना में पीएनजी ज्यादा सुरक्षित है। इसीलिए सरकार भी अब ज्यादातर शहरों में पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाने में लगी है। ताकि गैस सप्लाई को और ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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