पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध जैसी स्थितियों का सबसे घातक असर पाकिस्तान की रसोई पर पड़ा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के कई शहरों में एक घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत ₹4,000 से ₹5,000 के बीच पहुंच गई है। यह बढ़ोत्तरी इतनी अचानक और भारी है कि आम जनता के लिए अब घर का चूल्हा जलाना भी एक लग्जरी बन गया है। कंगाली की कगार पर खड़े देश में गैस की इस किल्लत ने चारों ओर हाहाकार मचा दिया है।
कीमतों में उछाल की मुख्य वजह
पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई का बाधित होना है। पाकिस्तान अपनी जरूरत की अधिकतर एलपीजी आयात (Import) करता है। हालिया हफ्तों में लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण गैस टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपये की लगातार गिरती कीमत ने आयात को और भी महंगा बना दिया है, जिसका सीधा बोझ वहां की गरीब जनता पर पड़ रहा है।
किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग का खेल
सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ी हैं, बल्कि बाजार से एलपीजी गायब भी हो गई है। लाहौर, कराची और पेशावर जैसे बड़े शहरों में गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। लोग घंटों लंबी लाइनों में लगने के बावजूद खाली सिलेंडर लेकर घर लौट रहे हैं। इस संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरों ने ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी है। जो सिलेंडर आधिकारिक तौर पर ₹3,000 के आसपास होना चाहिए, उसे गुपचुप तरीके से ₹5,000 या उससे भी अधिक में बेचा जा रहा है। कई इलाकों में तो लोग प्लास्टिक की थैलियों में खतरनाक तरीके से गैस भरकर ले जाने को मजबूर हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकता है।
जनता का बढ़ता गुस्सा और बेबसी
महंगाई की इस मार ने पाकिस्तानी आवाम की कमर तोड़ दी है। आटा, दाल और बिजली के बाद अब रसोई गैस की इस बढ़ोत्तरी ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग खाली सिलेंडर पीटकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों का कहना है कि उनकी आधी से ज्यादा कमाई सिर्फ खाना पकाने के इंतजाम में ही खत्म हो रही है। कई घरों में फिर से लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल शुरू हो गया है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
