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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर छाया काला बादल, व्यापार घाटे की मार से बेहाल

Pakistan Economy: नकदी संकट से जूझ रहा पाकिस्तान सितंबर में 3.34 अरब डॉलर के व्यापार घाटे पर पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 46% अधिक है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आयात में वृद्धि और निर्यात में गिरावट के कारण देश के बाह्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है, जिससे मुद्रा की स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

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पाकिस्तान का व्यापार घाटा हुआ आसमान छूने को तैयार! (तस्वीर-istock)

Photo : iStock

Pakistan Economy : नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को एक और आर्थिक झटका लगा है। देश का व्यापार घाटा सितंबर 2025 में 46 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि के साथ 3.34 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 2.29 अरब डॉलर था। इस बढ़ोतरी के पीछे आयात में तेज इजाफा और निर्यात में गिरावट मुख्य वजह रही है। इससे पाकिस्तान के पहले से ही दबाव में चल रहे बाह्य क्षेत्र और मुद्रा की स्थिरता पर गंभीर खतरे मंडराने लगे हैं।

आयात-निर्यात के ताजा आंकड़े

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो (PBS) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 में देश का आयात 14 प्रतिशत बढ़कर 5.85 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर, निर्यात में 11.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 2.5 अरब डॉलर रह गया। इसका सीधा असर व्यापार घाटे पर पड़ा, जो अगस्त 2025 की तुलना में 16.3 प्रतिशत अधिक रहा।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी घाटा बढ़ा

जुलाई से सितंबर 2025 की पहली तिमाही में पाकिस्तान का कुल व्यापार घाटा 32.9 प्रतिशत बढ़कर 9.37 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान कुल आयात 13.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 16.97 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि निर्यात 3.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ सिर्फ 7.6 अरब डॉलर रहा।

आर्थिक विशेषज्ञों की चेतावनी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अर्थशास्त्रियों ने व्यापार घाटे में इस तेज़ बढ़ोतरी को गंभीर चेतावनी के रूप में देखा है। उनका कहना है कि बढ़ता व्यापार घाटा पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सकता है। इससे न केवल पाकिस्तानी रुपये की अस्थिरता और अवमूल्यन की आशंका है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऋण भुगतान भी और अधिक जटिल हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान को अपने आयात पर नियंत्रण रखने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने होंगे। अन्यथा, देश को भविष्य में और अधिक गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले ही कर्ज, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में व्यापार घाटे का इस प्रकार बढ़ना न केवल आर्थिक प्रबंधन की विफलता की ओर इशारा करता है, बल्कि आम जनता पर भी इसके गंभीर दुष्परिणाम पड़ सकते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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