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KSH International IPO Listing: कमजोर लिस्टिंग से निवेशकों को झटका, इश्यू प्राइस से 6% नीचे लुढ़का शेयर प्राइस

KSH International IPO से निवेशकों को निराशा हाथ लगी है। मंगलवार को शेयर बाजार में NSE-BSE पर इसकी लिस्टिंग हुई। आईपीओ में निवेश करने वालों को लिस्टिंग के दौरान बड़ा झटका लगा है। क्योंकि, इश्यू प्राइस 384 रुपये प्रति शेयर की तुलना में लिस्टिंग 370 रुपये प्रति शेयर पर हुई है। इस तरह प्रति शेयर निवेशकों को 14 रुपये का नुकसान हुआ है।

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निवेशकों को झटका। (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)

KSH International IPO Listing Price: शेयर बाजार में मंगलवार को KSH International की लिस्टिंग निवेशकों को निराश करती दिखी। कंपनी के शेयर BSE और NSE दोनों पर IPO प्राइस के मुकाबले करीब 4% डिस्काउंट पर खुले। यह डेब्यू पहले से संकेत दे रहे ग्रे मार्केट ट्रेंड्स के अनुरूप ही रहा, जहां लिस्टिंग से पहले GMP शून्य था। फिलहाल, कमजोर लिस्टिंग के बाद शेयर प्राइस में गिरावट बढ़ती दिख रही है। 10:45 बजे तक शेयर इश्यू प्राइस से 6.25% नीचे 360 रुपये पर ट्रेड कर रहा है।

निवेशक उत्साह कमजोर

KSH International के शेयर 384 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 370 रुपये पर लिस्ट हुए, यानी लगभग 3.6% का डिस्काउंट देखने को मिला है। यह साफ संकेत है कि बाजार में कंपनी के फंडामेंटल्स के बावजूद वैल्यूएशन को लेकर निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे। वहीं, ग्रे मार्केट में भी लिस्टिंग से पहले कोई प्रीमियम नहीं दिखा, जिससे कमजोर डेब्यू लगभग तय माना जा रहा था।

सब्सक्रिप्शन सिर्फ 83%, OFS साइज में कटौती

IPO को कुल मिलाकर करीब 83% ही सब्सक्रिप्शन मिला। खास बात यह रही कि इश्यू बंद होने के बाद कंपनी ने ऑफर फॉर सेल यानी OFS के साइज में कटौती की, जिससे 290 करोड़ रुपये का OFS घटाकर 224.4 करोड़ कर दिया गया। हालांकि, 420 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू जस का तस रखा गया। इसके बाद कुल IPO साइज 710 करोड़ रुपये से घटकर 644.4 करोड़ रुपये का रह गया। इस कदम का मकसद अलॉटमेंट को आसान बनाना और पोस्ट-लिस्टिंग स्टेबिलिटी बनाए रखना बताया गया।

QIB के अलावा बाकी कैटेगरी में कमजोर मांग

IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB सेगमेंट में मांग थोड़ी बेहतर रही, लेकिन नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स और रिटेल कैटेगरी में सब्सक्रिप्शन 1x से नीचे रहा। बाजार विशेषज्ञ इसे बिजनेस के रिजेक्शन की बजाय वैल्यूएशन सेंसिटिविटी मान रहे हैं, खासकर मौजूदा माहौल में बड़े मैन्युफैक्चरिंग IPO को लेकर निवेशकों की सतर्कता बढ़ी है।

मजबूत बिजनेस, लेकिन मार्जिन दबाव में

1979 में स्थापित KSH International भारत में मैगनेट वाइंडिंग वायर की तीसरी सबसे बड़ी निर्माता और सबसे बड़ी एक्सपोर्टर है। कंपनी पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, रेलवे, ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्रियल सेक्टर को सप्लाई करती है। इसके क्लाइंट्स में PGCIL, NTPC, NPCIL जैसे बड़े नाम शामिल हैं और कंपनी 24 देशों में एक्सपोर्ट करती है। महाराष्ट्र में इसके तीन प्लांट हैं और FY26 में चौथा प्लांट शुरू होने की योजना है।

फाइनेंशियल्स मजबूत, लेकिन मार्जिन की चिंता

FY25 में कंपनी की कुल आय 1,938 करोड़ रुपये रही, जबकि मुनाफा 82% उछलकर 67 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसके बावजूद PAT मार्जिन करीब 3.5% और EBITDA मार्जिन 6.35% ही है। कंपनी पर 360 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है और डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.17 के आसपास है। IPO से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने और कैपेक्स में लगाया जाना है, जिससे आगे चलकर बैलेंस शीट मजबूत होने की उम्मीद है।

कैसी है आगे की राह?

KSH International की लिस्टिंग ने साफ कर दिया है कि फिलहाल निवेशक शॉर्ट टर्म लिस्टिंग गेन से ज्यादा लॉन्ग टर्म फंडामेंटल्स पर नजर रख रहे हैं। कमजोर डेब्यू के बाद अब शेयर की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी कर्ज घटाने, मार्जिन सुधारने और कैपेसिटी विस्तार को कितनी तेजी से जमीन पर उतार पाती है।

डिस्क्लेमर: TimesNow Hindi किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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