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1 महीने में 17% भागा कोरियाई शेयर बाजार, Sensex 2% पर अटका, क्यों दुनिया से अलग चल रहा KOSPI?

दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार इस समय दुनिया का सबसे तेज भागने वाला बाजार बन गया है। KOSPI इंडेक्स एक महीने में 17% से ज्यादा चढ़ चुका है, जबकि इसी अवधि में भारत का Sensex करीब 2% की बढ़त तक सीमित रहा। इसके पीछे बड़े नीतिगत और सेक्टोरल बदलाव हैं।

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कोरियाई शेयर बाजार 17% चढ़ा

जब दुनिया के बड़े बाजार सीमित दायरे में फंसे हैं, दक्षिण कोरिया का बेंचमार्क KOSPI रफ्तार पकड़ चुका है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक एक महीने में कोरिया स्टॉक मार्केट का बेंचमार्क इंडेक्स KOSPI 17% से ज्यादा की छलांग लगाकर दुनिया में बेस्ट परफॉर्मर बन गया है। वहीं, इस दौरान भारत के Sensex ने महज 2% का रिटर्न ही दिया है। दुनिया के ज्यादातर बड़े बाजारों का भारत जैसा ही हाल है।

KOSPI बनाम ग्लोबल मार्केट

KOSPI की तुलना में प्रमुख वैश्विक बाजारों की चाल काफी फीकी रही है। जहां कोरियाई इंडेक्स एक महीने में 17% से ज्यादा चढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंच गया, वहीं भारत का Sensex लगभग 2% की बढ़त तक सीमित है। जापान का Nikkei 225 मध्यम एकल अंकों में आगे बढ़ा है, हांगकांग का Hang Seng सीमित तेजी दिखा पाया है, जबकि अमेरिकी S&P 500 सपाट से हल्की गिरावट के दायरे में रहा। यानी जब ज्यादातर बाजार कंसोलिडेशन मोड में हैं, KOSPI साफ तौर पर आउटपरफॉर्मर बनकर उभरा है।

KOSPI vs Global Market

KOSPI vs Global Market

रिफॉर्म्स ने बदली धारणा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यूंग (Lee Jae Myung) के नेतृत्व में दक्षिण कोरिया ने कॉरपोरेट गवर्नेंस सुधारों की तेज शुरुआत की है। बोर्ड की जवाबदेही बढ़ाने, ट्रेजरी शेयर कैंसिलेशन और डिविडेंड नीति में बदलाव जैसे कदमों ने लंबे समय से चले आ रहे “कोरिया डिस्काउंट” को कम करने का संकेत दिया है। निवेशकों को भरोसा मिला है कि अल्पांश शेयरधारकों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी, जिससे वैल्यूएशन री-रेटिंग का रास्ता खुला।

KOSPI 5000 के लक्ष्य से आगे

चुनावी अभियान के दौरान राष्ट्रपति ली ने “KOSPI 5000” का नारा दिया था, जो अब उनकी एक प्रतीकात्मक उपलब्धि बन चुका है। क्योंकि, इंडेक्स 5,800 के पार पहुंचकर यह दिखा चुका है कि बाजार सरकार की नीतिगत दिशा को सकारात्मक मान रहा है। तेज रफ्तार रैली ने विदेशी और घरेलू दोनों निवेशकों का ध्यान खींचा है।

AI बूम का टेक सेक्टर को सहारा

Samsung Electronics और SK Hynix जैसे दिग्गजों को वैश्विक AI बूम का सीधा फायदा मिला है। हाई बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स और डेटा सेंटर डिमांड में उछाल ने कमाई के अनुमान मजबूत किए हैं। टेक शेयरों की तेजी ने पूरे इंडेक्स को ऊपर खींचा है।

दुनिया से अलग चाल

पिछले एक साल में KOSPI की परफॉर्मेंस कई प्रमुख वैश्विक इंडेक्स से बेहतर रही है। जहां अमेरिकी बाजार उच्च स्तरों पर कंसोलिडेट कर रहे हैं और एशियाई बाजार सीमित दायरे में हैं, वहीं कोरिया वैल्यूएशन एक्सपैंशन के दौर में है। एक महीने में 17% की छलांग इसकी ताजा मिसाल है।

रियल एस्टेट से इक्विटी की ओर रुझान

कोरिया में घरेलू संपत्ति का बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से रियल एस्टेट में रहा है। लेकिन सरकार की सख्त प्रॉपर्टी नीतियों और इक्विटी फ्रेंडली सुधारों ने पूंजी को शेयर बाजार की ओर मोड़ा है। रिटेल निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने तेजी को और बल दिया है।

जोखिम भी मौजूद

हाल की तिमाही में अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत मिले हैं और घरेलू कर्ज ऊंचे स्तर पर है। यदि शेयर बाजार की तेजी वास्तविक आर्थिक वृद्धि में तब्दील नहीं होती, तो वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है। साथ ही वैश्विक मांग में कमी या टेक साइकल में ठंडक जोखिम कारक बने रहेंगे। दक्षिण कोरिया का बाजार फिलहाल रिफॉर्म, टेक ग्रोथ और निवेशक भरोसे के सहारे दौड़ रहा है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि यह रैली स्थायी आर्थिक मजबूती में बदलती है या केवल सेंटिमेंट आधारित उछाल साबित होती है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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