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कंपनियों को 7 तारीख तक वेतन का भुगतान करना जरूरी, न्यू लेबर कोड में जुड़ा बड़ा अपडेट

न्यू लेबर कोड सैलरी की सीमा की परवाह किए बिना सभी कर्मचारियों को समय पर मजदूरी मिलने की सुरक्षा देता है।

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न्यू लेबर कोड

केंद्र सरकार की ओर से न्यू लेबर कोड को लागू कर दिया गया है। इसके बाद कई राज्यों ने इस नए लेबर कोड को लागू किया है और कुछ राज्या लागू करने की प्रक्रिया में है। अगर आप किसी राज्य में काम करते हैं तो इस नए लेबर कोड के प्रावधान जानना बहुत जरूरी है। आपको बता दें कि चार नए लेबर कोड में से एक, 'कोड ऑन वेजेज' (Code on Wages) में यह साफ तौर पर बताया गया है कि कंपनी को सैलरी और मजदूरी कब देनी चाहिए। इसके तहत, चालू महीने की सैलरी अगले महीने के 7 तारीख तक देना जरूरी है। वहीं, अगर कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या उसे नौकरी से निकाला जाता है या छंटनी की जाती है, तो उसका आखिरी बकाया भुगतान दो वर्किंग डेज के अंदर करना जरूरी है।

एम्प्लॉयर को सैलरी कब देनी चाहिए?

कोड में वेतन अवधि के आधार पर अलग-अलग समय-सीमा तय की गई है। जो कर्मचारी मासिक आधार पर वेतन पाते हैं, उन्हें अगले महीने के 7 तारीख से पहले अपना वेतन मिल जाना चाहिए। वहीं, हफ्ते के आधार पर पेमेंट पाने वाले कर्मचारियों को हफ्ते के आखिरी कामकाजी दिन से पहले अपनी मजदूरी मिल जानी चाहिए। हर दो हफ्ते के आधार पर काम करने वालों को 2 हफ्ते की अवधि खत्म होने के दो दिनों के भीतर पेमेंट मिलना चाहिए, जबकि रोजाना मजदूरी पाने वाले कर्मचारियों को काम का दिन खत्म होने पर अपनी मजदूरी मिल जानी चाहिए।

अगर वेतन में देरी होती है तो क्या होगा?

इस कोड में प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए इंस्पेक्टर-सह-सुविधा प्रदाताओं की नियुक्ति का प्रावधान है। अगर वेतन में देरी होती है या बिना अनुमति के कटौती की जाती है, तो कर्मचारी कोड के तहत नियुक्त अधिकारी के पास दावा दायर कर सकते हैं। कानून में ऐसे दावे दायर करने के लिए तीन साल की समय-सीमा तय की गई है।

अगर अथॉरिटी किसी एम्प्लॉयर को वेतन या मुआवजा देने का निर्देश देती है और एम्प्लॉयर उस आदेश का पालन नहीं करता है, तो उस रकम को कोड के प्रावधानों के अनुसार जमीन के लगान की बकाया राशि की तरह वसूला जा सकता है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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