बिजनेस

TDS vs TCS: कटते तो दोनों एडवांस में ही हैं, फिर TDS और TCS में क्या है अंतर?

अगर टीडीएस, टीसीएस और एडवांस टैक्स के नियमों ने आपको भी कन्फ्यूज कर रखा है और किसी छोटी सी गलती पर भारी जुर्माने का डर सता रहा है, तो फिक्र मत कीजिए; आज हम आपकी इस पूरी उलझन को हमेशा के लिए दूर करने वाले हैं।

Image

TDS और TCS में क्या है अंतर?

अगर आप नौकरीपेशा हैं या बिजनेस करते हैं, तो आपने टीडीएस (TDS), टीसीएस (TCS) और एडवांस टैक्स (Advance Tax) के बारे में जरूर सुना होगा। कई लोग इन तीनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनकी अनदेखी या गलतफहमी के कारण अक्सर भारी जुर्माना भरना पड़ जाता है। दोनों कटते तो वैसे एडवांस टैक्स के तौर पर ही हैं लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। अगर आपको भी इनके बीच का अंतर नहीं पता है तो आइये बताते हैं इनके बीच में क्या अंतर है?

TDS क्या है?

टीडीएस (TDS) का सीधा सा मतलब है कमाई मिलते ही टैक्स की कटौती। जब आपको सैलरी मिलती है या बैंक एफडी (FD) पर ब्याज मिलता है, तो पैसा आपके खाते में आने से पहले ही सामने वाला व्यक्ति या बैंक उसमें से तय टैक्स काटकर सरकार के पास जमा कर देता है।

TDS क्या है?

वहीं, टीसीएस (TCS) आपकी कमाई पर नहीं, बल्कि आपके बड़े खर्चों पर लागू होता है। जब आप कोई लग्जरी कार खरीदते हैं, विदेशी टूर पैकेज बुक करते हैं या विदेश पैसे भेजते हैं, तो विक्रेता (Seller) सामान की कीमत के साथ ही थोड़ा अतिरिक्त टैक्स वसूलता है और उसे सरकार को देता है।

कौन देता है ये टैक्स?

दूसरी तरफ, एडवांस टैक्स (Advance Tax) उन लोगों के लिए है जिनकी कमाई पर टीडीएस या टीसीएस पूरी तरह नहीं कटता। अगर पूरे साल में आपकी कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या उससे अधिक बनती है, तो आपको अपनी अनुमानित कमाई के हिसाब से साल के दौरान ही खुद टैक्स जमा करना होता है।

इनके नियमों में मुख्य अंतर समय का है। एडवांस टैक्स साल में चार किस्तों (15 जून, 15 सितंबर, 15 दिसंबर और 15 मार्च) में चुकाया जाता है। वहीं, टीडीएस और टीसीएस काटने वाले संस्थानों को यह राशि हर महीने की 7 तारीख तक सरकारी खाते में जमा करनी होती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article