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नाम, पता या सिग्नेचर में गलती होने पर भी नहीं रुकेगा क्लेम, म्यूचुअल फंड नॉमिनी के लिए बड़ा फैसला

म्यूचुअल फंड नॉमिनीज के लिए राहत की खबर है। AMFI ने क्लेम प्रक्रिया को और सरल बना दिया है, जिससे अब निवेशक की मृत्यु के बाद नाम या पते में मामूली अंतर होने पर भी क्लेम नहीं अटकेगा।

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नाम, पता या सिग्नेचर में गलती होने पर भी नहीं रुकेगा क्लेम

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेशकों और उनके आश्रितों के लिए एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने एक बेहद राहत भरा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अक्सर देखा जाता है कि किसी निवेशक के निधन के बाद जब उसका नॉमिनी क्लेम (Transmission Claim) दर्ज करने जाता है, तो दस्तावेज़ों में नाम की स्पेलिंग(Spelling), पते या साइन (Signature) में मामूली अंतर के कारण दावे अटक जाते थे। इस जटिल और कागजी प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए एम्फी (AMFI) ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब क्लर्कल या माइनर मिस्टेक के कारण किसी भी नॉमिनी का क्लेम खारिज नहीं किया जाएगा।

क्या है नया नियम?

नए नियमों के अनुसार, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) और रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट्स (RTAs) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे छोटे-मोटे बेमेल आंकड़ों (Mismatches) के आधार पर दावों को न अटकाएं। यदि मृतक निवेशक के पैन कार्ड, आधार कार्ड या बैंक खाते के विवरण में नॉमिनी के नाम की स्पेलिंग में थोड़ा-बहुत अंतर है, तो एएमसी को अन्य वैध सरकारी पहचान पत्रों के जरिए उसका मिलान करके क्लेम प्रोसेस करना होगा। इसी तरह, यदि पुराने और नए हस्ताक्षरों में मामूली भिन्नता पाई जाती है, तो बैंक प्रमाणीकरण (Bank Attestation) या पैन/आधार वेरिफिकेशन के जरिए क्लेम को आगे बढ़ाया जाएगा।

एम्फी का यह कदम बाजार नियामक सेबी (SEBI) की उस पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य निवेशकों के पैसों को सुचारू रूप से उनके कानूनी वारिसों तक पहुँचाना है। इससे पहले, मामूली गलतियों को सुधारने के लिए नॉमिनी को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे, नोटरी से हलफनामा (Affidavit) बनवाना पड़ता था या फिर क्षतिपूर्ति बांड (Indemnity Bond) जमा करना पड़ता था। इस पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय और काफी पैसा बर्बाद होता था। नए दिशा-निर्देशों से न केवल क्लेम प्रोसेसिंग का समय घटकर बेहद कम हो जाएगा, बल्कि अनक्लेम्ड अमाउंट (Unclaimed Mutual Fund Assets) की समस्या पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।

क्लेम प्रोसेस हुआ आसान

इसके अलावा, एम्फी ने क्लेम प्रोसेस को पूरी तरह से डिजिटल और मानकीकृत (Standardized) बनाने पर जोर दिया है। अब सभी म्यूचुअल फंड हाउसों को क्लेम ट्रांसफर के लिए एक जैसा और सरल प्रारूप अपनाना होगा। यदि किसी मामले में कोई बड़ा संशय होता है, तभी अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएंगे, अन्यथा बेसिक केवाईसी (KYC) और मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) के सत्यापन के बाद राशि सीधे नॉमिनी के प्रमाणित बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी। एम्फी के इस बड़े सुधार से देश भर के करोड़ों म्यूचुअल फंड निवेशकों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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