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Ethanol Blending: सरकारी आंकड़ों में बड़ा खुलासा, पेट्रोल से महंगा पड़ रहा इथेनॉल, आखिर क्यों?

सरकार इथेनॉल खरीद के पक्ष में कई तर्क देती है लेकिन आपको जानकार शायद आश्चर्य होगा कि पेट्रोल के मुकाबले देश में बना इथेनॉल महंगा है

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इथेनॉल ब्लेंडिंग

पेट्रोल में इथेनॉल को मिलाने को लेकर देशभर में बबाल मचा हुआ है। गाड़ी मालिकों का आरोप है कि इथेनॉल मिलाने से उनकी गाड़ी खराब हो रही है और माइलेज घट रहा है। वहीं, सरकार का इथेनॉल बेल्डिंग को विदेशी मुद्रा बचाने और आत्मनिर्भर बनने का तर्क है। इस बीच एक चौंकाने वाला आंकड़ा आया है। सोमवार को संसद में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां अब इथेनॉल खरीदने के लिए पेट्रोल से ज्यादा कीमत का भुगतान कर रही हैं।

पेट्रोलियम सेक्टर के जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और इथेनॉल की कीमत आंकने का सही पैमाना कच्चा तेल नहीं, बल्कि रिफाइनरी-गेट पेट्रोल है। खरीद के आधार पर OMCs (ऑयल मार्केटिंग कंपनियां) इथेनॉल के लिए जो तय कीमत (फीडस्टॉक के आधार पर लगभग ₹65 से ₹72 प्रति लीटर) चुकाती हैं। वहीं, पेट्रोल की टैक्स-से-पहले की रिफाइनरी-गेट लागत (जो लगभग ₹53 प्रति लीटर है) से ज्यादा है।

ईरान युद्ध के बाद पेट्रोल खरीदना हुआ महंगा

पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि सरकारी तेल कंपनियों ने इथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 (जून तक) में 49,577 करोड़ रुपये में 705 करोड़ लीटर से ज्यादा इथेनॉल खरीदा, जिसकी औसत कीमत 70.2 रुपये प्रति लीटर रही। प्रति लीटर कीमत में कोई खास बदलाव नहीं आया है, 2023-24 में यह 71.8 रुपये और 2024-25 में 71.6 रुपये थी, जबकि इसी दौरान कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। बता दें कि भारत में कच्चे तेल के आयात की औसत लागत FY25 में ₹47.54 प्रति लीटर और FY26 में ₹42.96 प्रति लीटर थी, लेकिन ईरान के साथ टकराव की वजह से आखिरी महीने में कीमतें तेज़ी से बढ़ीं (फरवरी 2026 में ₹41.76 से बढ़कर मार्च में ₹68.69 हो गईं)।

इथेनॉल की खरीद कैसे होती है

OMCs इथेनॉल घरेलू स्तर पर गन्ने से बनने वाले फीडस्टॉक और अनाज से बनने वाले फीडस्टॉक से खरीदती है। तीन बड़ी सरकारी तेल कंपनियां (IOCL, BPCL और HPCL) खुद इसका उत्पादन लगभग नहीं के बराबर करती हैं।

20% से ज्यादा ब्लेंडिंग पर अभी कोई फैसला नहीं

सरकार ने साफ किया है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को E20 से ऊपर बढ़ाने का कोई फैसला अभी नहीं है। केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि कोई भी बढ़ोतरी "विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन और सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के बाद ही" की जाएगी। उन्होंने बताया कि भारत ने E20 का लक्ष्य समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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