इस साल टैक्स रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया में कई अहम बदलाव हुए हैं। ऐसे में अगर आप अपना ITR फाइल करने की सोच रहे हैं तो आपको बदलाव की जानकारी होनी जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर आईटीआर फाइल करने में गलती हो सकती है और बार में आपके पास आयकर विभाग का नोटिस आ सकता है। आइए जानते हैं इस साल के 5 अहम बदलावों के बारे में।
1. दो घरों से होने वाली इनकम की जानकारी
इस साल उन टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत है जिनके पास एक से ज्यादा घर हैं। पहले, सैलरी पाने वाले लोग जो ITR-1 (सहज) फाइल करते थे और छोटे बिजनेस वाले टैक्सपेयर्स जो ITR-4 (सुगम) का इस्तेमाल करते थे, उनके पास जानकारी देने के मामले में सीमित विकल्प थे। अब, टैक्सपेयर्स इन फॉर्म का इस्तेमाल करते हुए दो घरों से होने वाली इनकम की जानकारी दे सकते हैं।
2. कैपिटल गेन्स टैक्स की पुरानी कैटेगरी अब नहीं होंगी
अगर पिछले साल कैपिटल गेन्स की रिपोर्टिंग ने आपको उलझन में डाला था, तो अब चीज़ें आसान हो सकती हैं। AY 2025–26 में, बजट में किए गए बदलावों के कारण टैक्सपेयर्स को इस आधार पर अलग-अलग गेन्स की रिपोर्टिंग करनी पड़ती थी कि ट्रांजैक्शन 23 जुलाई, 2024 से पहले हुए थे या बाद में। अलग-अलग समय पर शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म गेन्स पर अलग-अलग टैक्स रेट लागू होते थे। AY 2026–27 के लिए, रिपोर्टिंग के वे पुराने फील्ड हटा दिए गए हैं। चूंकि FY 2025–26 में एक ही कैपिटल गेन्स टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, इसलिए टैक्सपेयर्स को अब तारीखों के आधार पर ट्रांजैक्शन को उसी तरह अलग-अलग करने की जरूरत नहीं होगी।
3. किराए के लिए नई जानकारी देनी होगी
एक और बदलाव जो मकान मालिकों का ध्यान खींच सकता है, वह है किराए से जुड़ी जानकारी देने की नई जरूरत, जो वसूल नहीं हो पाया है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-1 और ITR-4 समेत ITR फॉर्म में किराए की वह रकम जो वसूल नहीं हो पाई नाम का एक अलग फील्ड जोड़ा है। पहले, इन फॉर्म को भरने वाले टैक्सपेयर्स के पास नहीं मिल पाए किराए की जानकारी देने के लिए कोई अलग जगह नहीं थी। इस बदलाव का मकसद किराए से होने वाली इनकम की जानकारी को ज्यादा डिटेल में और पारदर्शी बनाना है।
4. बैंक बैलेंस की जानकारी देना
प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम के तहत ITR-4 भरने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक अतिरिक्त जानकारी देना जरूरी हो गया है। सेक्शन 44AD, 44ADA और 44AE के दायरे में आने वाले लोगों को अब 31 मार्च, 2026 तक सभी एक्टिव बैंक अकाउंट्स के कुल क्लोजिंग बैलेंस की जानकारी देनी होगी। यह जानकारी ITR-4 के फील्ड E21 में देनी होगी। टैक्स एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि गलत जानकारी देने या बैलेंस की जानकारी न देने पर टैक्स नोटिस या पेनल्टी लग सकती है।
5. सही ITR फॉर्म का चुनाव
सही ITR फॉर्म चुनना हमेशा से जरूरी रहा है, लेकिन इस साल यह और भी अहम हो गया है। जिन टैक्सपेयर्स की इनकम के कई जरिये हैं, जैसे सैलरी, किराए से इनकम, कैपिटल गेन्स, फ्रीलांस कमाई, ट्रेडिंग एक्टिविटी या बिजनेस से इनकम, उन्हें यह ध्यान से देखना पड़ सकता है कि उन पर कौन सा फॉर्म लागू होता है। गलत फॉर्म भरने से डिफेक्टिव रिटर्न के नोटिस मिल सकते हैं, रिफंड में देरी हो सकती है, टैक्स की गलत कैलकुलेशन हो सकती है या फिर कुछ टैक्स फायदे (जैसे नुकसान को आगे ले जाना) भी नहीं मिल सकते हैं।
फाइल करने से पहले टैक्सपेयर्स क्या करें?
भले ही ऑनलाइन फाइलिंग शुरू हो चुकी है, लेकिन कई सैलरी पाने वाले कर्मचारी अभी भी फॉर्म 16 का इंतजार कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि इस समय का इस्तेमाल जरूरी डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करने, बैंक स्टेटमेंट देखने, इन्वेस्टमेंट के सबूत चेक करने और यह समझने में करें कि आपकी इनकम पर कौन सा ITR फॉर्म लागू होता है।
