Ganpati Sthapana Niyam: घर में गणपति स्थापना से पहले जान लें ये 7 जरूरी नियम, पूजा में नहीं होगी भूल

Ganpati Sthapana Niyam: गणेश चतुर्थी पर घर में गणपति बप्पा की स्थापना कैसे करें? जानें प्रतिमा की सही दिशा, सूंड, पूजा, भोग और विसर्जन से जुड़े 7 जरूरी नियम।

Authored by: Medha ChawlaUpdated Sep 9 2026, 14:03 IST
साफ और शांत जगह चुनेंImage Credit : Canva01 / 07

साफ और शांत जगह चुनें

गणपति स्थापना के लिए घर का साफ, शांत और पवित्र स्थान चुनें। पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करके चौकी बिछाएं। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर ही गणपति की प्रतिमा स्थापित करें।

गणपति की सूंड की दिशा देखेंImage Credit : Canva02 / 07

गणपति की सूंड की दिशा देखें

घर में स्थापना के लिए बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति शुभ माने जाते हैं। ऐसी प्रतिमा की पूजा के नियम अपेक्षाकृत सरल होते हैं। दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा में विशेष नियम और अधिक शुद्धता रखनी पड़ती है।

बैठी हुई प्रतिमा रखेंImage Credit : Canva03 / 07

बैठी हुई प्रतिमा रखें

गृहस्थ जीवन के लिए बैठे हुए गणपति की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है। इसे सुख, स्थिरता और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। प्रतिमा खंडित न हो और उसमें गणपति का स्वरूप स्पष्ट दिखाई दे।

सही दिशा में करें स्थापनाImage Credit : Canva04 / 07

सही दिशा में करें स्थापना

गणपति की प्रतिमा उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना अच्छा माना जाता है। प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखने से बचें। स्थापना ऐसी जगह न करें जहां लोगों के पैर या जूते सीधे पूजा स्थल की ओर आते हों।

शुभ मुहूर्त में करें प्राण प्रतिष्ठाImage Credit : Canva05 / 07

शुभ मुहूर्त में करें प्राण प्रतिष्ठा

गणपति स्थापना शुभ मुहूर्त में करें। संकल्प लेकर भगवान गणेश का आह्वान करें। इसके बाद जल, अक्षत, फूल, दूर्वा, सिंदूर, धूप, दीप और मोदक अर्पित करके आरती करें।

दूर्वा और मोदक जरूर चढ़ाएंImage Credit : Canva06 / 07

दूर्वा और मोदक जरूर चढ़ाएं

भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक विशेष प्रिय माने जाते हैं। दूर्वा साफ पानी से धोकर अर्पित करें। भोग हमेशा सात्विक हो। पूजा में मांसाहार, शराब और तामसिक चीजों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।

विसर्जन तक रखें नियमित पूजाImage Credit : Canva07 / 07

विसर्जन तक रखें नियमित पूजा

गणपति स्थापना के बाद सुबह-शाम दीप जलाएं और आरती करें। प्रतिमा को लंबे समय तक अकेला छोड़ने से बचें। जितने दिन की स्थापना का संकल्प लिया है, उसी के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या दसवें दिन श्रद्धापूर्वक विसर्जन करें।

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