बिजनेस

कच्चे तेल का खड़ा हो सकता है नया संकट, दुआ करें इजरायल-हमास युद्ध जल्द हो जाए खत्म

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Oct 9, 2023, 09:31 AM IST

Israel-Palestine war And Crude Prices: आशंका है कि अगर इजरायल-हमास युद्ध जल्द खत्म नहीं होता है तो इस संघर्ष में अमेरिका और ईरान उलझ सकते हैं। जिसका सीधा असर कच्चे तेल सप्लाई पर दिखेगा। इस समय मिडिल ईस्ट से पूरी दुनिया की एक तिहाई सप्लाई होती है।

Image

पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर

Israel-Palestine war: इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध जैसे-जैसे अपने पैर पसार रहा है, उसका असर अब कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने की आशंका बढ़ गई है। इजराइल और हमास के बीच सैन्य झड़पों ने पूरे मिडिल ईस्ट में राजनीतिक अनिश्चितता को गहरा कर दिया है। इस कारण सोमवार को ब्रेंट क्रूड 3.19 डॉलर यानी 3.77% बढ़कर 87.77 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि WTI क्रूड 3.36 डॉलर यानी 4.06% बढ़कर 86.15 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। चिंता की बात यह है कि जैसे-जैसे इजरायल और हमास के बीच भीषण होगा, वैसे ही तेल की कीमतें बेलगाम हो सकती है। जिससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने की आशंका है।

मिडिल ईस्ट करता है एक तिहाई सप्लाई

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट अनुसार इजराइल में हो रहीं घटनाएं तेल आपूर्ति के लिए तुरंत कोई खतरा पैदा नहीं करती हैं। लेकिन आशंका है कि अगर यह युद्ध जल्द नहीं खत्म होता है तो इस संघर्ष में अमेरिका और ईरान उलझ सकते हैं। जिसका सीधा असर तेल सप्लाई पर दिखेगा। इस समय मिडिल ईस्ट से पूरी दुनिया की एक तिहाई कच्चे तेल की सप्लाई होती है। वहीं रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसर मिडिल ईस्ट में जोखिम बढ़ने से तेल की कीमतें बढ़ने का अनुमान है।

महंगाई का डर

अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती है, तो उसका सीधा सर महंगाई पर पड़ेगा। और पूरी दुनिया में सप्लाई चेन पर भी असर हो सकता है। इसके अलावा ऐसी आरोप लग रहे हैं कि इजरायल पर हुए हमले में ईरान का भी हाथ है। अगर ईरान का शामिल होना साबित होता है, तो फिर अमेरिका सहित दूसरे पश्चिमी देश ईरान पर प्रतिबंधों का ऐलान कर सकते हैं। इससे भी तेल की कीमतों में आग लगने का आशंका है।

मोदी सरकार के लिए चुनौती

भारत में अपनी जरूरतों का 84 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। और उसमें से मिडिल ईस्ट से करीब 44 फीसदी कच्चा तेल आयात कर रहा है। ऐसे में युद्ध बढ़ने से मोदी सरकार के लिए आपूर्ति के साथ-साथ महंगाई को कंट्रोल करने की भी चुनौती होगी। खास तौर से जब इस साल कई राज्यों में विधान सभा चुनाव हैं और अगले साल लोक सभा चुनाव हैं। भारत में मई 2022 के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई कमी नहीं आई थी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article