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ईरान युद्ध का असर: फिच ने भारत का जीडीपी ग्रोथ अनुमान घटाया, अब इतने रहने की उम्मीद

फिच रेटिंग्स ने कहा है कि कच्चे तेल महंगा होने का असर पूरी दुनिया समेत भारत पर होगा। इससे विकास की रफ्तार धीमी होगी।

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भारत विकास दर

अमेरिका और ईरान युद्ध ने भारत की जीडीपी ग्रोथ पर असर डाला है। इसके चलते फिच रेटिंग्स ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था के वृद्धि दर अनुमान को 6.7 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया। फिच के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष और इससे जुड़े तेल संकट के प्रभावों की वजह से यह कटौती की गई है। रेटिंग एजेंसी फिच ने जून महीने की अपनी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर धीमी रह सकती है लेकिन घरेलू मांग और निवेश से कुछ समर्थन मिलेगा।

घरेलू मांग से मिलेगा समर्थन

फिच रेटिंग्स ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 6.4 प्रतिशत रह जाएगी, जो मार्च के अनुमान से 0.3 प्रतिशत अंक कम है। घरेलू मांग वृद्धि का मुख्य आधार बनी रहेगी और वास्तविक संदर्भ में आयात कम होने से शुद्ध बाहरी मांग इस वृद्धि में सकारात्मक योगदान देगी। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च मुद्रास्फीति और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से वास्तविक आय पर दबाव बढ़ेगा, जिससे उपभोक्ता खर्च प्रभावित होगा। यह प्रभाव विशेष रूप से वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी एवं तीसरी तिमाही में अधिक दिखाई देगा।

पूरी दुनिया पर महंगे कच्चे तेल का असर

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई है और इसका असर भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। फिच ने ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत के अनुमान को बढ़ाकर 87 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो पहले 70 डॉलर प्रति बैरल था। इसके साथ ही पश्चिम एशिया संघर्ष की वजह से 14 सप्ताह से बंद होर्मुज जलडमरूमध्य के जुलाई तक बंद रहने का ही अनुमान लगाया गया है।

1970 जैसा संकट नहीं

हालांकि यह रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर 1970 के दशक जैसे गंभीर तेल संकट की तुलना में कम होगा, क्योंकि आज ऊर्जा की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी कम हो गई है। फिच रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कोल्टन ने कहा कि तेल की कीमतों में तेजी से वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ रहा है और जोखिम बढ़ रहे हैं। लेकिन दुनिया भर में आईटी पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है, जो निकट अवधि में आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक असर को कुछ हद तक कम कर रहा है।

भारत में बढ़ेगी महंगाई

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इस संकट के बावजूद भारत में मुद्रास्फीति अभी अधिक नहीं बढ़ी है, लेकिन इस पर दबाव बढ़ रहा है। अप्रैल में थोक मुद्रास्फीति 8.3 प्रतिशत और खुदरा मुद्रास्फीति 3.5 प्रतिशत रही। फिच ने अनुमान जताया कि साल के अंत तक महंगाई बढ़कर 5.3 प्रतिशत तक जा सकती है। इसका कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, आधार प्रभाव और संभावित कमजोर मानसून है।

रुपये को लेकर यह अनुमान जताया

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भले ही रेपो रेट को फिलहाल 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है लेकिन बढ़ते महंगाई दबाव के चलते इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी कर इसे 5.5 प्रतिशत किया जा सकता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पर फिच ने कहा कि रुपये में बड़ी गिरावट की संभावना सीमित है और यह चालू वित्त वर्ष में औसतन 97.50 प्रति डॉलर के स्तर पर रह सकता है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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