Who Was India First Union Education Minister: नीट पेपर लीक के चलते जंतर मंतर पर चल रहे विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसके बाद देर रात सरकार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया है। बता दें देश में शिक्षा मंत्री का पद बेहद महत्वपूर्ण माना (First Education Minister) जाता है। आजादी के बाद देश के कई नेताओं ने शिक्षा मंत्री के तौर पर काम किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री कौन थे? अगर आप भी नहीं जानते हैं कि देश के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री कौन थे तो यहां जान लीजिए।
Who Was India First Union Education Minister: भारत के पहले शिक्षा मंत्री कौन थे
बता दें देश के पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) मौलाना अबुल कलाम आजाद थे। उन्होंने 15 अगस्त 1947 से 22 जनवरी 1958 तक देश के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। कलाम साहब का जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का में हुआ था। बाद में उनका परिवार भारत आ गया था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वह साल 1923 में मात्र 35 वर्ष की आयु में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत वर्ष 1992 में भारत रत्न से सम्मानित किया था। हर साल 11 नवंबर को उनकी जन्म जयंती को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
Desh Ke Pahle Shiksha Mantri Ka Naam: देश के पहले IIT संस्थान की स्थापना
आजाद साहब का लक्ष्य प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाना और शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाना था। साथ ही उन्होंने लड़कियों की शिक्षा को भी समान रूप से महत्वपूर्ण माना और महिला शिक्षा को बढ़ावा दिया। इसके अलावा उन्होंने देश में पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Kharagpur) की स्थापना की। इसकी स्थापना 18 अगस्त 1951 को की गई थी।

भारत के पहले शिक्षा मंत्री कौन थे
First Union Education Minister: विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा
अबुल कलाम आजाद साहब का मानना था कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि विद्यार्थियों के नैतिक मूल्यों, सोच और व्यक्तित्व का भी विकास होना जरूरी है। उन्होंने विज्ञान और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया। साथ ही साहित्य, संगीत, कला और संस्कृति के संरक्षण में भी अहम योगदान दिया।
भारत दे दूसरे और तीसरे शिक्षा मंत्री
12 फरवरी 1958 को डॉ के.एल. श्रीमाली ने दूसरे शिक्षा मंत्री (मानव संसाधन विकास मंत्री) के तौर पर शपथ ली। इनका कार्यकाल 31 अगस्त 1963 तक रहा। इसके बाद 1 सितंबर 1963 को हुमायूं कबीर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री बने औप इनका कार्यकाल 21 नवंबर 1963 तक रहा।
