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खत्म होगा तेल संकट! ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 3 बड़ी शर्तें, कहा- चुपचाप मान लो, होर्मुज खोल देंगे

ईरान ने होर्मुज को फिर से खोलने के बदले अमेरिका के सामने 3 शर्तें रखी हैं। ईरान का साफ कहना है कि वह ट्रंप प्रशासन के दबाव में घुटने नहीं टेकेगा, लेकिन अगर उसकी मांगें मान ली जाती हैं, तो दुनिया को तेल संकट से राहत मिल सकती है।

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iran crude oil

पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट और कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर घुटने नहीं टेकेगा, लेकिन वह वैश्विक तेल संकट को खत्म करने के लिए बातचीत को तैयार है। ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से आए एक बयान में कहा गया है कि अगर अमेरिका उनकी तीन प्रमुख शर्तें मान लेता है, तो वे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Hormuz ) को फिर से खोलने पर विचार कर सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर ईरान की वो कौन सी 3 शर्तें हैं जो अगर अमेरिका मान लेता है तो होर्मुज खुल जाएगा और तेल संकट भी खत्म हो जाएगा?

ईरान की 3 बड़ी शर्तें

  • ईरान ने शांति की बहाली के लिए जो शर्तें रखी हैं, वे पूरी तरह से उनकी अर्थव्यवस्था और संप्रभुता से जुड़ी हैं। पहली शर्त यह है कि अमेरिका ईरान पर लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाए, जिससे उनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार फिर से शुरू हो सके।
  • दूसरी शर्त के तहत ईरान ने मांग की है कि उनकी जमी हुई विदेशी संपत्ति (Frozen Assets) को बहाल किया जाए, ताकि वे अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभाल सकें।
  • तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि अमेरिका खाड़ी देशों से अपनी सेनाओं को पीछे हटाए और ईरान के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करे। ईरान का कहना है कि ये शर्तें केवल उनकी मांग नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान का सवाल हैं।

होर्मुज का महत्व और वैश्विक दबाव

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की 'ऊर्जा धमनी' (Energy Artery) माना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस रास्ते की घेराबंदी करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। यदि यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूरी दुनिया में महंगाई का ऐसा दौर आएगा जिसे संभालना किसी भी देश के लिए मुश्किल होगा। यही कारण है कि ईरान अब इस रास्ते को एक 'हथियार' की तरह इस्तेमाल कर रहा है ताकि वह अमेरिका को समझौते की मेज पर ला सके।

दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'मैक्सिमम प्रेशर' (Maximum Pressure) नीति पर अडिग हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान के सामने झुकना उनकी कमजोरी माना जाएगा। हालांकि, अमेरिकी विशेषज्ञों का एक धड़ा यह भी चेतावनी दे रहा है कि अगर ट्रंप ने लचीलापन नहीं दिखाया, तो तेल की कीमतें अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह सम्मानजनक समझौता चाहता है, न कि आत्मसमर्पण।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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