दाने-दाने को मोहताज पड़ोसी देश पाकिस्तान पर ईरान और अमेरिका युद्ध का बहुत ही बुरा असर हुआ है। महंगे क्रूड ऑयल के आयात से पाकिस्तान का वस्तु व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में 20 प्रतिशत बढ़कर 32 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हाल के दिनों में पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमत में कई बार बढ़ोतरी की गई है। इससे जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा है। ईरान युद्ध के चलते जरूरी सामान का आयात करना भी महंगा हो गया है। इससे देश के नाजुक आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तान पहले ही आर्थिक बदहाली का शिकार है। अपने खर्चे चलाने के लिए चीन, आईएमएफ और खाड़ी देशों के कर्ज पर टिका है। ऐसे में Iran संकट के कारण आयात बिल बढ़ा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर आर्थिक बोझ बढ़ा हे।
निर्यात के मुकाबले दोगुना आयात बिल
Pakistan ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए ’द न्यूज’ ने बताया कि आयात का मूल्य निर्यात की तुलना में दोगुने से भी अधिक रहा। पीबीएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 ( एक जुलाई से 30 जून) की जुलाई-अप्रैल अवधि के दौरान आयात लगभग सात प्रतिशत बढ़कर 57.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात छह प्रतिशत से अधिक घटकर 25.2 अरब डॉलर रहा। इस अंतर को अर्थशास्त्रियों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालने और पाकिस्तानी मुद्रा पर असर डालने वाला बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट अप्रैल 2026 में भी जारी रही, जब मासिक व्यापार घाटा एक साल पहले की तुलना में लगभग चार प्रतिशत बढ़कर चार अरब डॉलर से थोड़ा अधिक हो गया।
सर्विस सेक्टर के मोर्चे पर राहत
मासिक निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 2.48 अरब डॉलर हो गया, लेकिन आयात की तुलना में यह कम रहा, जो 7.5 प्रतिशत बढ़कर 6.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सर्विस सेक्टर के मोर्चे पर कुछ राहत मिली। वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-मार्च अवधि के दौरान सेवाओं का व्यापार घाटा 6.7 प्रतिशत घटकर 2.15 अरब डॉलर रहा। सेवा निर्यात 17 प्रतिशत बढ़कर 7.35 अरब डॉलर रहा। वहीं सेवाओं का आयात लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
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