Iran Crisis Impact: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। ईरान संकट गहराने के कारण सोमवार को सेंसेक्स 2,346 अंक टूट गया जबकि निफ्टी में 709 अंक की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले भी शुक्रवार को भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। अगर पिछले एक महीने का डेटा देखें तो सेंसेक्स में करीब 7000 अंकों की बड़ी गिरावट आ चुकी है। सेंसेक्स 85 हजार के हाई से टूटकर 77 के नीचे पहुंच गया है। इस गिरावट के चलते देशभर के छोटे निवेशकों के लाखों करोड़ डूब गए हैं। अब जब ईरान संकट का हल निकलता नहीं दिख रहा है तो निवेशक और डरे हुए हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि वह अपनी मेहनत की कमाई को कैसे बचाएं? अगर आप निवेशक हैं और इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो आइए जानते हैं कि आपको क्या करना चाहिए?
आखिर क्यों लगातार टूट रहा स्टॉक मार्केट?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा कि ब्रेंट क्रूड के 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों को बड़ा झटका लगा है। अगर पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। इस चिंता में भारतीय बाजार लगातार टूट रहा है। डॉलर के सामने रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी इसमें हवा देने का काम कर रहा है।
इस हालात में क्या करें छोटे निवेशक?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा माहौल में एक डिसिप्लिन्ड इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी की जरूरत है क्योंकि जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण वोलैटिलिटी ज्यादा रहने की संभावना है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, मौजूदा जियोपॉलिटिकल माहौल ने इन्वेस्टर्स को सावधान रहने और सुरक्षित एसेट्स की ओर जाने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए हम पैनिक में सेल-ऑफ से बचने और एक डिसिप्लिन्ड, लॉन्ग-टर्म नज़रिया अपनाने की सलाह देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन्वेस्टर्स को सब्र रखना चाहिए क्योंकि मौजूदा करेक्शन ग्लोबल अनिश्चितताओं के स्टेबल होने पर लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए चुनिंदा मौके बना सकता है। हम सलाह देते हैं कि पैनिक में बिकवाली से बचें और एक डिसिप्लिन्ड, लॉन्ग-टर्म नजरिया अपनाएं और अगले कुछ हफ्तों तक सब्र रखें, क्योंकि मौजूदा प्राइस लेवल मीडियम से लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए एक स्ट्रेटेजिक एंट्री पॉइंट दे सकते हैं।
