Iran War Impact on Food Supply: मध्य-पूर्व में जारी ईरान युद्ध का असर अब केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका प्रभाव ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी दिखाई देने लगा है। ईंधन की कमी के कारण दुनिया भर में खेती, मछली पकड़ने और खाद्य उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे आने वाले समय में खाद्य कीमतों और महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
ईंधन संकट से प्रभावित हो रही खेती
रिपोर्ट्स के अनुसार कई देशों में किसान डीजल से चलने वाली मशीनों पर निर्भर रहते हैं, जिनका इस्तेमाल बुवाई, सिंचाई और फसल कटाई में किया जाता है। लेकिन ईंधन की कमी के कारण इन गतिविधियों में रुकावट आने लगी है। अगर यह स्थिति लंबी चली तो कृषि उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है और ग्लोबल फूड सप्लाई कमजोर हो सकती है।
मछली पकड़ने और खाद्य परिवहन पर भी असर
ईंधन संकट केवल खेतों तक सीमित नहीं है। मछली पकड़ने वाली नावें, खाद्य परिवहन ट्रक और कोल्ड-स्टोरेज लॉजिस्टिक्स भी बड़े पैमाने पर ईंधन पर निर्भर हैं। ईंधन महंगा या कम होने से इन सेवाओं की लागत बढ़ रही है, जिसका असर सीधे तौर पर बाजार में मिलने वाले खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ सकता है।
बढ़ सकती है वैश्विक महंगाई
जानकारों का मानना है कि अगर ईंधन की कमी और ऊर्जा संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर केवल फूड सप्लाई तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं और इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
कई देशों के लिए बढ़ी चिंता
कृषि और खाद्य उत्पादन से जुड़े उद्योग पहले से ही बढ़ती लागत और आपूर्ति बाधाओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। खासकर वे देश जो ईंधन आयात पर ज्यादा निर्भर हैं, वहां फूड सप्लाई चेन पर दबाव अधिक देखने को मिल सकता है।
आने वाले महीनों में दिख सकता है असर
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल इसका प्रभाव शुरुआती चरण में है, लेकिन अगर एनर्जी सप्लाई में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में इसका असर वैश्विक खाद्य बाजार में स्पष्ट दिखाई दे सकता है। इससे कई देशों में खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं और खाद्य सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
