Infosys Share Crash : भारतीय IT सेक्टर के लिए यह साल किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी Infosys का शेयर बुधवार को टूटकर ₹986.90 पर पहुंच गया। सितंबर 2020 के बाद यह पहली बार है जब कंपनी का शेयर ₹1,000 के अहम स्तर से नीचे बंद हुआ। इस गिरावट के साथ कंपनी के मार्केट कैप से लाखों करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं और निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है?
आधा रह गया मार्केट कैप
इंफोसिस का शेयर फरवरी से लगातार दबाव में है। इस गिरावट के कारण कंपनी का मार्केट कैप अपने पीक से आधा रह गया है। 2024 में इंफोसिस का मार्केट कैप ₹8.37 लाख करोड़ तक पहुंच गया था, लेकिन अब यह घटकर आधा रह गया है। ₹4,37,000 करोड़ रह गया है।साल 2026 में शेयर करीब 40% टूट चुका है। पिछले साल इसमें 14% की गिरावट आई थी। इस तरह पिछले 18 महीनों में कुल गिरावट 47% तक पहुंच गई है। वहीं, अपने रिकॉर्ड हाई ₹2,006 से यह शेयर 51% से ज्यादा टूट चुका है, जो किसी ब्लू-चिप कंपनी के लिए बेहद बड़ी गिरावट मानी जा रही है। इस गिरावट का असर सिर्फ रिटेल निवेशकों पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि इंफोसिस में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले घरेलू म्यूचुअल फंड्स को भी हजारों करोड़ रुपये का मार्क-टू-मार्केट नुकसान उठाना पड़ा है।
AI ने उड़ा दी नींद
इंफोसिस और पूरे भारतीय IT सेक्टर को इस हाल में पहुंचाने के पीछे कोई एक वजह नहीं है, बल्कि कई वैश्विक संकट एक साथ आ गए हैं। हालांकि, इस बड़ी गिरावट की सबसे मुख्य और डरावनी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता दबदबा है। फरवरी में जब AI स्टार्टअप एंथ्रोपिक (Anthropic) ने अपना एडवांस कोडिंग टूल 'क्लाउड कोड' (Claude Code) लॉन्च किया, तो वैश्विक निवेशकों में हड़कंप मच गया। निवेशकों को डर है कि ये न्यू-एज जेनरेटिव एआई टूल्स पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट और आउटसोर्सिंग की जरूरत को ही खत्म कर देंगे, जिससे भारतीय आईटी कंपनियों का कोर बिजनेस खतरे में पड़ जाएगा।
अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने का डर
भारतीय IT कंपनियां की कमाई का एक बड़ा USA से आता है। अमेरिका में महंगाई के लगातार बढ़ रही है। इस वजह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका है। जब अमेरिका में कर्ज महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियां खर्च में कटौती करती हैं, इसका सीधा असर भारत की IT कंपनियों पर पड़ता है।
एक्सेंचर का कमजोर गाइडेंस
ग्लोबल IT दिग्गज एक्सेंचर ने हाल ही में दुनिया भर में टेक खर्च को लेकर बेहद कमजोर और सतर्क गाइडेंस जारी किया है। इसके बाद से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने भारतीय IT शेयरों को ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू की है। नतीजतन, Nifty IT इस साल 32% गिरकर 2026 का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स बन गया है।
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