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SIP तो चल रही है लेकिन फिर भी नहीं बन रहा पैसा! कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 7 गलतियां

बहुत से लोगों के साथ ऐसा होता है कि वे लंबे समय से म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए निवेश तो करते हैं लेकिन उन्हें अपना पैसा उम्मीद के मुताबिक बढ़ता नजर नहीं आता।

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SIP करने के बाद भी क्यों नहीं बढ़ रहा पैसा (Photo: iStock)

SIP को म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में लंबे समय तक निवेश करने और धीरे-धीरे बड़ा फंड तैयार करने का तरीका माना जाता है। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि केवल कई साल तक SIP चलाते रहने से ही बड़ा फंड तैयार हो जाएगा। कई बार निवेशक वर्षों तक हर महीने पैसा जमा करते रहते हैं, फिर भी उन्हें लगता है कि उनकी रकम उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही, जैसी उन्होंने सोची थी। इसकी वजह अक्सर निवेश का तरीका और उससे जुड़ी कुछ गलतियां होती हैं। आइए जानते हैं फंड न बढ़ने की कौन-सी वजहें होती हैं-

बिना लक्ष्य के SIP शुरू करना

कई लोग केवल दूसरे लोगों को देखकर SIP शुरू कर देते हैं। लेकिन अगर यह तय नहीं है कि पैसा किस लक्ष्य के लिए और कितने समय में चाहिए, तो सही फंड और निवेश अवधि चुनना मुश्किल हो जाता है। यानी लक्ष्य के हिसाब से निवेश की योजना बनाया जाना बेहद जरूरी है।

बार-बार फंड बदलना

बाजार में गिरावट आते ही कुछ निवेशक अपना फंड बदलने लगते हैं। किसी दूसरे फंड का रिटर्न देखकर भी मौजूदा SIP बंद कर देते हैं। इससे निवेश की निरंतरता और कंपाउंडिंग का फायदा प्रभावित होता है।

हालिया रिटर्न देखकर फंड चुनना

जिस फंड ने पिछले एक-दो साल में अच्छा प्रदर्शन किया हो, जरूरी नहीं कि वह आगे भी पहले जैसा ही रिटर्न देगा। सिर्फ हालिया रिटर्न देखकर निवेश करना जोखिम बढ़ा सकता है। फंड की लंबी अवधि की प्रदर्शन क्षमता, जोखिम और निवेश रणनीति को भी देखा जाना चाहिए।

SIP की रकम वर्षों तक बिल्कुल न बढ़ाना

महंगाई के साथ आमदनी बढ़ने पर भी अगर SIP की रकम वही रहती है, तो भविष्य का लक्ष्य दूर हो सकता है। उदाहरण के लिए, वेतन बढ़ने के साथ SIP में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी करने से लंबे समय में निवेश की कुल रकम काफी बढ़ सकती है।

बाजार गिरने पर SIP रोक देना

बाजार में उतार-चढ़ाव निवेश का हिस्सा है। गिरावट के समय घबराकर SIP रोक देना लंबे समय के निवेश में बाधा डाल सकता है। हालांकि, किसी फंड की बुनियादी स्थिति या निवेश लक्ष्य बदलने पर समीक्षा जरूर करनी चाहिए।

बहुत ज्यादा फंड में पैसा बांट देना

म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर डायवर्सिफिकेशन जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा म्यूचुअल फंड रखने से पोर्टफोलियो समझना मुश्किल हो सकता है और कई फंड एक जैसी कंपनियों में निवेश कर रहे हों तो वास्तविक डायवर्सिफिकेशन भी कम हो सकता है।

SIP को शॉर्टकट समझना

निवेशकों को समझना चाहिए कि SIP जल्दी पैसा दोगुना करने का तरीका नहीं है। रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करता है और इसमें गारंटी नहीं होती। निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, लक्ष्य और समय अवधि के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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