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Inflation: 2025 में काबू में रही महंगाई, 2026 में नई प्लानिंग की तैयारी

Inflation: खाद्य कीमतों में नरमी और जीएसटी में कटौती के कारण इस वर्ष भारत में महंगाई नियंत्रण में रही। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर आरबीआई के 2-6 प्रतिशत सहज दायरे में रही और अगले वर्ष भी इसी स्तर पर रहने की संभावना है। 2026 में CPI गणना में बदलाव और मौद्रिक नीति में संशोधन की तैयारी है, जिससे ब्याज दरों में और कटौती हो सकती है।

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भारत में महंगाई पर नरमी, 2026 में नई योजना की तैयारी (तस्वीर-istock)

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Inflation: भारत में इस साल महंगाई की स्थिति नियंत्रण में रही है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी और कुछ वस्तुओं पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में कटौती के कारण खुदरा महंगाई दर (CPI आधारित) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2-6 प्रतिशत के सहज दायरे में बनी रही। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह स्थिति अगले साल भी जारी रह सकती है। इससे केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों में कम से कम एक और कटौती का रास्ता खुल सकता है।

जीएसटी कटौती से महंगाई पर असर

सितंबर 2025 में सरकार ने लगभग 400 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी की दरें कम कीं। इस कदम से देश में मूल्य स्थिति में सुधार हुआ। साथ ही, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में भी नरमी देखी गई। वर्ष की शुरुआत में WPI आधारित महंगाई बढ़ी थी, लेकिन जल्दी ही इसमें गिरावट आई, खासकर खाद्य और ईंधन की कीमतों में।

थोक मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट

न्यूज एजेसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक थोक मुद्रास्फीति जून 2025 में घटने लगी और यह रुख जुलाई और अक्टूबर में भी जारी रहा। इसका मतलब है कि महंगाई पर दबाव कम हुआ है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित कुल महंगाई नवंबर 2024 से घटने लगी और जून 2025 तक यह 2-4 प्रतिशत के भीतर बनी रही। इसके बाद यह 2 प्रतिशत से नीचे चली गई।

खाद्य महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट

CPI में खाद्य महंगाई का हिस्सा लगभग 48 प्रतिशत है। जनवरी में यह लगभग 6 प्रतिशत थी, लेकिन जून में यह शून्य से नीचे चली गई। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में खाद्य महंगाई -3.91 प्रतिशत रही, यानी कीमतें घट रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आम उपभोक्ता को महंगाई का दबाव कम महसूस हुआ।

नई CPI सीरीज की तैयारी

सरकार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला पर काम कर रही है, जिसका आधार वर्ष 2024=100 होगा। इसमें कवरेज, मदों की सूची, भार और गणना की प्रक्रिया में बड़े बदलाव होंगे। यह पहला ऐसा बड़ा कदम है जो एक दशक से ज्यादा समय बाद लिया जा रहा है। नई श्रृंखला फरवरी 2026 में जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य महंगाई के आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाना है।

आरबीआई की मुद्रास्फीति अनुमान

RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि 2026-27 की पहली छमाही में शीर्ष मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत के करीब रहने का अनुमान है। कीमती धातुओं के अलावा महंगाई काफी कम रहने की संभावना है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि नया CPI और उसकी संरचना 2026 में महंगाई के वास्तविक पूर्वानुमान को प्रभावित कर सकती है।

WPI और CPI में अंतर

रेटिंग एजेंसी ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने बताया कि WPI और CPI में अंतर उनके भार निर्धारण और शामिल वस्तुओं के दायरे के कारण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों सूचकांक अलग-अलग दृष्टिकोण से महंगाई को मापते हैं।

भविष्य का महंगाई परिदृश्य

क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि 2025 में दोनों सूचकांकों ने अपेक्षा से कम आंकड़े दिखाए। बेहद कम मुद्रास्फीति ने RBI को ब्याज दरें घटाने का अवसर दिया। 2026-27 में उपभोक्ता महंगाई लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, जिसका मुख्य कारण बेस इफेक्ट होगा। ब्याज दरें 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है, लेकिन पहले की कटौती का असर अभी भी जारी रहेगा।

RBI की आगामी मौद्रिक नीति

भारतीय रिजर्व बैंक की 2025-26 की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति 4-6 फरवरी 2026 के दौरान घोषित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण और नई CPI श्रृंखला के प्रभाव के कारण ब्याज दरों और महंगाई पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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