Direct Tax Collection: चालू वित्त वर्ष में 17 मार्च तक देश का नेट डायरेक्ट टैक्स क्लेक्शन 7.1 प्रतिशत बढ़कर करीीब 22.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इनकम टैक्स विभाग द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण टैक्स रिफंड जारी करने की धीमी रफ्तार और कंपनी टैक्स संग्रह में अच्छी बढ़ोतरी रही है। सरकार के लिए यह आंकड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि इससे अर्थव्यवस्था में स्थिरता और राजस्व संग्रह में मजबूती का संकेत मिलता है। आंकड़ों के मुताबिक, शुद्ध कंपनी टैक्स संग्रह में करीब 13 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 9.68 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह दर्शाता है कि कंपनियों की आय और लाभ में सुधार हुआ है, जिससे सरकार को अधिक टैक्स प्राप्त हुआ। दूसरी ओर, व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) और अन्य गैर-कॉरपोरेट इकाइयों से मिलने वाला कर संग्रह केवल 3 प्रतिशत बढ़कर करीब 11.32 लाख करोड़ रुपये रहा। इससे संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत आय के स्तर पर वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है।
प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में भी इजाफा
प्रतिभूति लेनदेन टैक्स (STT) संग्रह में भी वृद्धि देखी गई है। 1 अप्रैल 2025 से 17 मार्च 2026 के बीच STT संग्रह 5 प्रतिशत बढ़कर 55,717 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 53,095 करोड़ रुपये था। यह बढ़ोतरी शेयर बाजार में लेनदेन की बढ़ती गतिविधियों को दर्शाती है, जो निवेशकों की सक्रियता का संकेत है।
टैक्स रिफंड में गिरावट
इस अवधि के दौरान कर रिफंड जारी करने में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। कुल रिफंड घटकर 4.34 लाख करोड़ रुपये रह गया है। रिफंड की धीमी गति भी शुद्ध कर संग्रह में वृद्धि का एक प्रमुख कारण रही है, क्योंकि कम रिफंड जारी होने से सरकार के पास अधिक शुद्ध राजस्व बना रहता है।
अग्रिम टैक्स संग्रह में सुधार
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इनकम टैक्स विभाग ने बताया कि अग्रिम कर संग्रह में भी अच्छी वृद्धि हुई है। चार किस्तों में जमा किए गए अग्रिम कर में 6.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 11.13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अग्रिम कर की अंतिम किस्त 15 मार्च को समाप्त हुई। यह वृद्धि दर्शाती है कि करदाताओं की आय में स्थिरता बनी हुई है और वे समय पर कर भुगतान कर रहे हैं।
