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15 साल की सबसे बड़ी गिरावट! 2026 में शेयर बाजार से ₹48 लाख करोड़ साफ, पाकिस्तान की GDP से ज्यादा नुकसान

2026 में भारतीय शेयर बाजार से अब तक 48 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू साफ हो चुकी है। यह रकम पाकिस्तान की जीडीपी से भी ज्यादा है। पिछले 15 साल में भारतीय शेयर बाजार में आई यह सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

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15 साल में सबसे बड़ी गिरावट का दौर

India market Crash 2026: भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 अब तक भारी गिरावट वाला साल साबित हुआ है। साल की शुरुआत से अब तक बाजार से करीब $533 अरब यानी लगभग ₹48 लाख करोड़ की मार्केट वैल्यू साफ हो चुकी है। यह पिछले 15 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

15 साल में सबसे बड़ी गिरावट

2026 में अब तक भारतीय कंपनियों की कुल मार्केट कैप में करीब $533 अरब की गिरावट दर्ज की गई है। रुपये में यह नुकसान करीब ₹48 लाख करोड़ बैठता है। यह गिरावट 2011 के बाद सबसे बड़ी है। उस समय पूरे साल के दौरान भारतीय बाजार से करीब $625 अरब की मार्केट वैल्यू साफ हो गई थी। गिरावट के बाद भारत की कुल मार्केट कैप अब घटकर करीब $4.77 ट्रिलियन रह गई है, जो अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत में यह करीब $5.3 ट्रिलियन थी।

कैसे 15 साल की सबसे बड़ी गिरावट?

2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से करीब $533 अरब (लगभग ₹48 लाख करोड़) की मार्केट वैल्यू साफ हो चुकी है। यह गिरावट 2011 के बाद सबसे बड़ी मानी जा रही है। 2011 में पूरे साल के दौरान भारतीय बाजार से करीब $625 अरब की वैल्यू मिट गई थी। इसके बाद पिछले डेढ़ दशक में किसी भी साल में इतनी बड़ी मार्केट कैप गिरावट नहीं देखी गई। इसी वजह से 2026 की मौजूदा गिरावट को पिछले 15 वर्षों की सबसे बड़ी वैल्यूएशन गिरावट कहा जा रहा है।

सालमार्केट कैप में बदलाव
2011-$625 अरब
2013-$110 अरब (लगभग)
2015-$70 अरब (लगभग)
2018-$350 अरब (लगभग)
2022-$180 अरब (लगभग)
2026 (अब तक)-$533 अरब

पाकिस्तान की GDP से ज्यादा नुकसान

बाजार में आई यह गिरावट आकार के लिहाज से बेहद बड़ी मानी जा रही है। 2026 में अब तक जो मार्केट वैल्यू खत्म हुई है, वह पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था के आकार से भी ज्यादा है। अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के मुताबिक पाकिस्तान की GDP करीब $30–400 अरब के आसपास है, जबकि भारतीय बाजार से $533 अरब की वैल्यू साफ हो चुकी है।

कई देशों के शेयर बाजार से बड़ा झटका

भारतीय बाजार में जो वैल्यूएशन मिटा है वह कई देशों के पूरे शेयर बाजार से भी ज्यादा है। यह नुकसान मेक्सिको, मलेशिया, साउथ अफ्रीका, नॉर्वे, फिनलैंड, वियतनाम और पोलैंड जैसे देशों की कुल मार्केट वैल्यू से भी बड़ा है। साथ ही यह गिरावट चिली, ऑस्ट्रिया, फिलीपींस, कतर और कुवैत जैसे देशों के पूरे शेयर बाजार के आकार से लगभग दोगुनी बताई जा रही है।

देशप्रमुख स्टॉक एक्सचेंजकुल मार्केट कैप (लगभग)
मैक्सिकोMexican Stock Exchange (BMV)~$450 अरब
मलेशियाBursa Malaysia~$420 अरब
साउथ अफ्रीकाJohannesburg Stock Exchange~$400 अरब
नॉर्वेOslo Stock Exchange~$320 अरब
फिनलैंडNasdaq Helsinki~$310 अरब
वियतनामHo Chi Minh Stock Exchange~$280 अरब
पोलैंडWarsaw Stock Exchange~$260 अरब

कुछ देशों के बाजार से दोगुना नुकसान

देशप्रमुख स्टॉक एक्सचेंजकुल मार्केट कैप (लगभग)
चिलीSantiago Stock Exchange~$220 अरब
ऑस्ट्रियाVienna Stock Exchange~$210 अरब
फिलीपींसPhilippine Stock Exchange~$200 अरब
कतरQatar Stock Exchange~$190 अरब
कुवैतBoursa Kuwait~$180 अरब

बाजार गिरने के पीछे क्या हैं वजहें

2026 की शुरुआत से भारतीय बाजार लगातार अस्थिर बना हुआ है। सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रहा है। इसके अलावा कॉर्पोरेट नतीजों की सुस्ती, वैश्विक ट्रेड तनाव और AI सेक्टर में सीमित हिस्सेदारी भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।

क्रूड ऑयल से बढ़ी आर्थिक चिंता

अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके चलते क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि इससे इम्पोर्ट बिल बढ़ता है और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर दबाव बढ़ता है। बार्कलेज के विश्लेषकों के अनुसार क्रूड की कीमत में हर $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी भारत के CAD को करीब $9 अरब तक बढ़ा सकती है।

इंडेक्स में भी बड़ी गिरावट

इस साल अब तक प्रमुख इंडेक्स भी दबाव में हैं। Sensex करीब 10.8% और Nifty लगभग 9.5% गिर चुके हैं। वहीं व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखी गई है। BSE Midcap 150 करीब 7.2% और BSE Smallcap 250 लगभग 9.5% नीचे आ चुके हैं।

Morgan Stanley ने घटाई रेटिंग

बढ़ते वैश्विक जोखिमों के बीच Morgan Stanley ने भारत की रेटिंग घटाकर “Equalweight” कर दी है, जिसे न्यूट्रल रुख माना जाता है। ब्रोकरेज का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे वैल्यूएशन और AI सेक्टर में सीमित एक्सपोजर के कारण विदेशी निवेशक फिलहाल भारत में निवेश बढ़ाने को लेकर सतर्क रह सकते हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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