देशभर के करोड़ों निवेशक इस समय परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि अपनी मेहनत की कमाई को आखिर कहां निवेश करें। इसकी वजह है कि सोने-चांदी से लेकर शेयर बाजार में बड़ी गिरावट। बीएसई सेंसेक्स में YTD (इस साल की शुरुआत से अब तक) आधार पर 14.99% की गिरावट है। वहीं, एनएसई निफ्टी50 भी YTD आधार पर 13.24% नीचे है। इसका असर SIP निवेशकों पर भी पड़ा है। SIP में निवेश करने वाले लाखों निवेशक अपने पोर्टफोलियो में निगेटिव रिटर्न देखकर परेशान हैं।
दूसरी ओर, सोना और चांदी भी अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे पहुंच गया है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से मिलने वाला रिटर्न भी काफी नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि मौजूदा माहौल में निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा कहां लगाएं? हमने इस सवाल का जवाब देश के दिग्गज फाइनेंशियल प्लानर से जानने की कोशिश की। आइए जानते हैं कि उन्होंने निवेशकों को क्या सलाह दी है।
अबतक कहां कितना नुकसान?
| एसेट | बाजार | ऑल-टाइम हाई (ATH) | ATH की तारीख | 29 सितंबर 2026 का स्तर | ATH से गिरावट |
|---|
| सेंसेक्स | BSE | 86,159.02 | 1 दिसंबर 2025 | 72,179.87 | 16.22% |
| निफ्टी 50 | NSE | 26,373.20 | 5 जनवरी 2026 | 22,606.10 | 14.28% |
| सोना | दिल्ली स्पॉट, 24K | ₹1,83,000/10 ग्राम | 29 जनवरी 2026 | ₹1,46,750/10 ग्राम | 19.81% |
| चांदी | दिल्ली स्पॉट, 999 | ₹4,04,500/किग्रा | 29 जनवरी 2026 | ₹2,26,670/किग्रा | 43.96% |
एसेट एलोकेशन ही है असली सुरक्षा कवच
सेबी सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी के अनुसार, मौजूदा बाजार में शॉर्ट टर्म व्यू के आधार पर निवेश की रणनीति बनाना निवेशकों के लिए आसान नहीं है। अगर निवेशक बेहतर रिटर्न हासिल करने के साथ जोखिम को कम करना चाहते हैं, तो उन्हें एसेट एलोकेशन और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान देना चाहिए। निवेशकों को अपना पैसा किसी एक एसेट क्लास में लगाने के बजाय गोल्ड, डेट और इक्विटी जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में बांटकर निवेश करना चाहिए।
सोलंकी ने कहा कि निवेशकों के लिए यह तय करना संभव नहीं है कि किस समय कौन-सा एसेट क्लास बेहतर प्रदर्शन करेगा। ऐसे में डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो निवेश को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। किसी एक एसेट क्लास के बेहतर प्रदर्शन करने पर वहां से रिटर्न मिल सकता है, जबकि दूसरे एसेट में कमजोरी होने पर पूरे पोर्टफोलियो पर उसका असर सीमित किया जा सकता है। इसके विपरीत, अगर निवेशक अपना पूरा पैसा किसी एक ही एसेट क्लास में लगा देते हैं, तो जोखिम बढ़ जाता है और खराब प्रदर्शन की स्थिति में रिटर्न पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि एसआईपी के जरिए शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बाजार हर समय एक जैसा प्रदर्शन नहीं करता। 10 साल की लंबी अवधि में भी शेयर बाजार का रिटर्न हर साल एक जैसा नहीं रहता। कुछ समय बाजार में तेजी हो सकती है, जबकि कुछ दौर में गिरावट या सीमित रिटर्न देखने को मिल सकता है।
इसलिए निवेशकों को शॉर्ट टर्म बाजार की चाल के आधार पर घबराने या जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनानी चाहिए।
इस संकट की वजह क्या है?
मौजूदा समय में शेयर बाजार, सोना-चांदी समेत कई निवेश विकल्पों में दबाव की कई वजहें हैं। महंगाई ऊंची रहने से ब्याज दरों में कटौती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे शेयर बाजार पर दबाव है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में अच्छी तेजी आने के बाद कई शेयरों का वैल्यूएशन भी महंगा हो गया था, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं।
दूसरी ओर, सोना और चांदी में भी पहले तेज तेजी आ चुकी थी, ऐसे में ऊंचे स्तरों से मुनाफावसूली और डॉलर व वैश्विक ब्याज दरों में बदलाव का असर इनकी कीमतों पर पड़ रहा है। आसान शब्दों में कहें तो मौजूदा दौर में वैश्विक आर्थिक माहौल, कच्चा तेल में उछाल, ब्याज दरें, डॉलर, महंगाई और निवेशकों की मुनाफावसूली मिलकर अलग-अलग एसेट क्लास को नीचे लाने का काम कर रही है।
मायूस निवेशक
इन गलतियों से बचें निवेशक?
एक्सपर्ट का कहना है कि निवेशकों को मौजूदा बाजार में घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में गिरावट देखकर पैनिक सेलिंग यानी नुकसान में जल्दबाजी में शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से बचें। इसी तरह, केवल बाजार गिरने के कारण अपनी SIP बंद करना भी जरूरी नहीं है, क्योंकि गिरते बाजार में उसी निवेश राशि से ज्यादा यूनिट मिल सकती हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर गिरते शेयर को खरीद लेना चाहिए। निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि बाजार में तेजी और गिरावट दोनों आते-जाते रहते हैं। ऐसे समय में धैर्य बनाए रखना, अपने वित्तीय लक्ष्य और निवेश अवधि के हिसाब से एसेट अलोकेशन करना ज्यादा जरूरी है।
