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टैरिफ कटौती के बाद किसानों की बल्ले-बल्ले, अमेरिका को 5000 टन बासमती चावल होगा निर्यात

Basmati Rice Export: भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) ने एक बयान में बताया कि उसके एक सदस्य ने अमेरिका के एक खरीदार के साथ 5,000 टन बासमती चावल की आपूर्ति के लिए व्यावसायिक समझौता किया है। यह डील भारतीय चावल निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद बड़ी सफलता (तस्वीर-istock)

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Basmati Rice Export : भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (आईआरईएफ) के एक सदस्य ने अमेरिका के एक खरीदार के साथ 5,000 टन बासमती चावल की आपूर्ति का बड़ा व्यापारिक समझौता किया है। महासंघ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। यह डील ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया है। इस वजह से इसे काफी अहम माना जा रहा है।

टैरिफ में कटौती से बढ़ेगा निर्यात

महासंघ के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले मौजूदा 25 प्रतिशत आयात टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है। टैरिफ में यह कमी भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरी खबर है। इससे भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में पहले से सस्ता और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। माना जा रहा है कि इसका सीधा फायदा बासमती चावल निर्यातकों को मिलेगा और अमेरिका में भारतीय चावल की मांग बढ़ेगी।

5000 टन बासमती चावल की आपूर्ति

न्यूज एजेंंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आईआरईएफ ने अपने बयान में कहा कि उसके एक सदस्य ने अमेरिका के एक खरीदार के साथ 5,000 टन बासमती चावल की आपूर्ति का सफल व्यावसायिक समझौता किया है। यह सौदा भारतीय चावल उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में चावल की आपूर्ति का समझौता बताता है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय बासमती चावल की मांग मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कमी के बाद इस तरह के और भी बड़े डील देखने को मिल सकते हैं। इससे न केवल निर्यातकों को फायदा होगा, बल्कि किसानों को भी बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है। बासमती चावल भारत का एक प्रमुख निर्यात उत्पाद है, जिसकी खुशबू और गुणवत्ता के कारण दुनिया भर में मांग रहती है।

गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर

आईआरईएफ ने अपने सभी सदस्यों से कहा है कि वे निर्यात के दौरान गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखें। महासंघ का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहने के लिए उच्च गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि निर्यातक तय मानकों का पालन करेंगे, तो भारतीय बासमती चावल की साख और मजबूत होगी। महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में लंबे समय तक कारोबार बनाए रखने के लिए गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और पारदर्शिता बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सभी सदस्यों को इन बातों का सख्ती से पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

किसानों और उद्योग को होगा लाभ

इस समझौते से भारतीय चावल उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है। निर्यात बढ़ने से देश के किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि अधिक मांग से बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, विदेशी मुद्रा आय में भी इजाफा होगा। कुल मिलाकर 5,000 टन बासमती चावल की आपूर्ति का यह समझौता भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। टैरिफ में कटौती और बढ़ते व्यापारिक सहयोग से आने वाले समय में भारतीय चावल निर्यात में और तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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