शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए किसी कंपनी का डीलिस्ट (Delisting) होना हमेशा से एक बड़ी और चिंताजनक खबर रही है, और हाल ही में जिंदल फोटो लिमिटेड (Jindal Photo Limited) को लेकर आई एक बड़ी अपडेट ने निवेशकों के मन में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कंपनी के बोर्ड ने शेयर बाजार से स्थायी रूप से हटने यानी डीलिस्ट होने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद अब केवल शेयरधारकों (Shareholders) की अंतिम मंजूरी मिलते ही यह कंपनी शेयर बाजार से पूरी तरह बाहर हो जाएगी।
डिलिस्टिंग के बाद शेयर और पैसों का क्या होता है?
इस खबर के सार्वजनिक होते ही निवेशकों के बीच सबसे बड़ा डर और असमंजस यह है कि उनके डीमैट खाते में पड़े जिंदल फोटो लिमिटेड के शेयरों का आगे क्या होगा, और क्या उनके द्वारा निवेश किया गया पैसा पूरी तरह से डूब जाएगा या शेयर रद्दी हो जाएंगे। इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब यह है कि आपके शेयर न तो रद्दी होंगे और न ही बेकार होंगे; डीलिस्टिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी आप कानूनी तौर पर उस कंपनी के हिस्सेदार यानी शेयरहोल्डर बने रहेंगे, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर आपके सामने एक बड़ी दिक्कत जरूर खड़ी हो जाएगी कि कंपनी का नाम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा, जिसके कारण आप आम दिनों की तरह इन शेयरों की खरीद-फरोख्त ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से नहीं कर पाएंगे।
सेबी के क्या है नियम?
हालांकि, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी (SEBI) के कड़े नियम हमेशा छोटे और रिटेल निवेशकों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करते हैं, जिसके तहत किसी भी कंपनी को बाजार से अचानक हटने और निवेशकों का पैसा फंसाने की अनुमति नहीं होती है। सेबी के नियमों के मुताबिक, कंपनी के शेयर बाजार से पूरी तरह डीलिस्ट होने से पहले कंपनी के मुख्य प्रमोटर्स को मौजूदा निवेशकों को बाजार से सुरक्षित बाहर निकलने का एक अंतिम और वैध अवसर देना अनिवार्य होता है, जिसे वित्तीय भाषा में 'एग्जिट ऑफर' (Exit Offer) कहा जाता है।
इस तय समय सीमा या ऑफर के दौरान कोई भी निवेशक अपने पास मौजूद शेयरों को सीधे प्रमोटर्स को वापस बेचकर अपनी पूरी निवेशित राशि सुरक्षित निकाल सकता है। इसी नियम के तहत जिंदल फोटो लिमिटेड ने भी अपने शेयरधारकों के लिए एक आधिकारिक एग्जिट ऑफर पेश किया है, जिसमें प्रमोटर्स ने निवेशकों से शेयर वापस खरीदने के लिए ₹1,119.50 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस (Floor Price) तय किया है, जबकि इसका इंडिकेटिव प्राइस ₹1,120 प्रति शेयर रखा गया है, जो निवेशकों को एक तय और पारदर्शी कीमत पर अपनी हिस्सेदारी बेचकर मुनाफे के साथ बाहर निकलने का बेहतरीन मौका देता है।
क्या शेयर बेच सकते हैं?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर कोई निवेशक इस आधिकारिक एग्जिट ऑफर के दौरान भी अपने शेयर प्रमोटर्स को नहीं बेच पाता है या मौका चूक जाता है, तो भविष्य में उसके पास क्या रास्ते बचते हैं। ऐसी स्थिति में भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे शेयर कानूनी तौर पर आपके डीमैट खाते (Demat Account) में पूरी तरह सुरक्षित और वैध बने रहेंगे और कंपनी के मालिकाना हक में आपका हिस्सा बरकरार रहेगा। परेशानी बस इतनी होगी कि भविष्य में जब भी आपको पैसों की जरूरत होगी और आप इन शेयरों को बेचना चाहेंगे, तो आपको स्टॉक एक्सचेंज का प्लेटफॉर्म नहीं मिलेगा; आपको खुद व्यक्तिगत स्तर पर बाजार से बाहर (Off-Market) किसी ऐसे खरीदार को ढूंढना होगा जो उस अनलिस्टेड कंपनी के शेयर खरीदने को तैयार हो, और फिर फिजिकल या ऑफ-मार्केट ट्रांसफर के जरिए यह सौदा करना होगा जो कि काफी पेचीदा और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है।
