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ईरानी तेल टैंकर के रूट बदलने पर सरकार ने कह दी बड़ी बात; भुगतान में समस्या के दावों को किया खारिज

ईरान से तेल या गैस खरीदने और उसके साथ भुगतान में समस्या के दावों पर केंद्र सरकार ने प्रतिक्रिया दी है। भारत का कहना है कि ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।

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ईरानी तेल टैंकर पिंग शुन को लेकर भारत की प्रतिक्रिया। (सांकेतिक तस्वीर)

ईरानी तेल लेकर आ रहे टैंकर ’पिंग शुन’ के भारत की बजाय चीन की ओर मुड़ने को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। केंद्र सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया करार दिया है। साथ ही सरकार ने कहा है कि भारतीय रिफाइनरियां ईरान के साथ ही अन्य देशों से भी तेल की आपूर्ति ले रही हैं।

तेल टैंकर को लेकर क्या प्रतिक्रिया

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन रिपोर्टों को भी खारिज किया,जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल लेकर जा रहा एक टैंकर भारत की ओर आते हुए बीच समुद्र में ही दिशा बदलकर चीन की ओर चला गया। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी रिपोर्टें वैश्विक तेल व्यापार की उस सामान्य प्रक्रिया को नजरअंदाज करती हैं जिसमें ऑपरेशनल लचीलेपन और व्यापारिक कारणों से जहाजों की मंजिल बदल सकती है। साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा कि अगर पिंगशुन जहाज की खेप लेकर भारत आता तो सात सालों में ऐसा पहली बार होता।

ईरानी तेल के बदले में भुगतान की कोई समस्या नहीं

मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट्स में फैक्ट के इतर यह दावा किया गया कि टैंकर को गुजरात के वाडिनार पोर्ट की जगह चीन भेजा गया क्योंकि तेल के भुगतान को लेकर अड़चनें थीं। इन दावों पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया, ईरानी कच्चे तेल के आयात में कोई भुगतान बाधा नहीं है।

भारतीय कंपनियां 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहीं

मंत्रालय ने कहा कि भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल आयात करता है और कंपनियों को वाणिज्यिक कारणों के आधार पर दुनिया के किसी भी हिस्से से तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता है। उसने कहा कि पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय रिफाइनरों ने अपना समूचा कच्चा तेल आयात सुरक्षित कर लिया है, और ईरान से आयात को लेकर किसी तरह की रुकावट की बात गलत है।

शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर ने किया था दावा

गौरतलब है कि इससे पहले शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर ने शुक्रवार को कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाला टैंकर ‘पिंग शुन’, अब गुजरात के वाडिनार की बजाय चीन के डोंगयिंग पोर्ट की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में अमेरिकी छूट के बाद भारतीय रिफाइनर समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के सीमित कार्गो खरीदने के अवसर तलाश रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि वैश्विक तेल व्यापार में जहाजों का ट्रांजिट के दौरान दिशाबदल सामान्य बात है, क्योंकि बिल ऑफ लैडिंग में अक्सर अस्थायी या संकेतात्मक डिस्चार्ज पोर्ट लिखे जाते हैं।

ईरानी एलपीजी लेकर ‘सी बर्ड’ पहुंचा मंगलौर

उसने दोहराया कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की ज़रूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईरानी एलपीजी लेकर जा रहा जहाज ‘सी बर्ड’, लगभग 44,000 टन कार्गो के साथ 2 अप्रैल को मंगलौर पहुंच गया था। इस समय उसे अनलोड़ किया जा रहा है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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