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ये हैं शाहजहां-औरगंजेब के दौर के धन्ना सेठ, कोई दुनिया का सबसे अमीर तो कोई बादशाह को देता था लोन

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Jun 12, 2023, 06:19 PM IST

India Richest Businessmen in The History:सूरत के कारोबारी विरजी वोरा दुनिया के सबसे रईस ट्रेडर कहलाते थे। 17 वीं शताब्दी के मध्य में विरजी वोरा का दुनिया भर में डंका बजता था। ऐसा कहा जाता है कि दक्कन की राजनीति में फंसने पर औरंगजेब की वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो गई थी। तो उसने सूरत के कारोबारियों से ब्याज मुक्त कर्ज मांगा था।

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ये कारोबारी मुगलों को देते थे उधार

India Richest Businessmen In the Period of Mughal Empire:मुगलों का दौर भारतीय इकोनॉमी के लिहाज से गोल्डेन दौर के रुप में माना जाता है। एक तरफ शाहजहां के दौर में दुनिया की जीडीपी में भारत की 25 फीसदी हिस्सेदारी थी, तो उस दौर में कई ऐसे कारोबारी थे आज के दौर के एलन मस्क, मुकेश अंबानी का रूतबा हासिल रखते थे। इन धन्ना सेठों का आलम यह था कि यह अंग्रेजों और मुगल बादशाहों, शहजादों को भी कर्ज दिया करते थे। इनका रुतबा ऐसा था कि एक को तो जगत सेठ तक कहा जाने लगा। वहीं सूरत के एक रईस ने तो औरंगजेब को कर्ज देने से मना कर दिया।

विरजी वोरा दुनिया का सबसे रईस कारोबारी

सूरत के कारोबारी विरजी वोरा दुनिया के सबसे रईस ट्रेडर कहलाते थे। 17 वीं शताब्दी के मध्य में विरजी वोरा का दुनिया भर में डंका बजता था। ऐसा कहा जाता है कि दक्कन की राजनीति में फंसने पर औरंगजेब की वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो गई थी। तो उसने सूरत के कारोबारियों से ब्याज मुक्त कर्ज मांगा था। लेकिन कारोबानियों ने उसे देने से मना कर दिया था। विरजी वोर की अमीरी ऐसी थी कि वह अंग्रेजों को भी लोन दिया करते थे।

शांतिदास जवाहरी ने औरंगजेब को झुकाया

शांतिदास जवाहरी आभूषणों का कारोबार किया करते थे। और शाहजहां के दौर में उनका कारोबार ऊंचाइयों पर था। उस दौर में शहजादा औरंगजेब ने एक मंदिर तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण करा दिया था। शांतिदास ने अपने रुतबे का इस्तेमाल कर शाहजहां पर दबाव बनाया और दोबारा मंदिर का निर्माण कराया। हालांकि जब औरंगजेब बादशाह बना तो उसने फिर से मंदिर तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण करा दिया।

पैसा इतना कि मिल गया जगत सेठ का खिताब

बंगाल के कारोबारी मानिक चंद का जलवा ऐसा था कि मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने मानकि चंद को सेठ का खिताब दिया था। जो कि बाद में जगत सेठ के नाम से मशहूर हुआ। और यह टाइटिल उनके परिवार के लोग भी इस्तेमाल करने लगे। मानिक चंद बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खां का कैशियर था। और दोनों ने मिलकर बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद का निर्माण किया। कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मानिक चंद की दौलत ब्रिटेन की इकोनॉमी से भी ज्यादा थी।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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