India Richest Businessmen In the Period of Mughal Empire:मुगलों का दौर भारतीय इकोनॉमी के लिहाज से गोल्डेन दौर के रुप में माना जाता है। एक तरफ शाहजहां के दौर में दुनिया की जीडीपी में भारत की 25 फीसदी हिस्सेदारी थी, तो उस दौर में कई ऐसे कारोबारी थे आज के दौर के एलन मस्क, मुकेश अंबानी का रूतबा हासिल रखते थे। इन धन्ना सेठों का आलम यह था कि यह अंग्रेजों और मुगल बादशाहों, शहजादों को भी कर्ज दिया करते थे। इनका रुतबा ऐसा था कि एक को तो जगत सेठ तक कहा जाने लगा। वहीं सूरत के एक रईस ने तो औरंगजेब को कर्ज देने से मना कर दिया।
विरजी वोरा दुनिया का सबसे रईस कारोबारी
सूरत के कारोबारी विरजी वोरा दुनिया के सबसे रईस ट्रेडर कहलाते थे। 17 वीं शताब्दी के मध्य में विरजी वोरा का दुनिया भर में डंका बजता था। ऐसा कहा जाता है कि दक्कन की राजनीति में फंसने पर औरंगजेब की वित्तीय स्थिति डांवाडोल हो गई थी। तो उसने सूरत के कारोबारियों से ब्याज मुक्त कर्ज मांगा था। लेकिन कारोबानियों ने उसे देने से मना कर दिया था। विरजी वोर की अमीरी ऐसी थी कि वह अंग्रेजों को भी लोन दिया करते थे।
शांतिदास जवाहरी ने औरंगजेब को झुकाया
शांतिदास जवाहरी आभूषणों का कारोबार किया करते थे। और शाहजहां के दौर में उनका कारोबार ऊंचाइयों पर था। उस दौर में शहजादा औरंगजेब ने एक मंदिर तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण करा दिया था। शांतिदास ने अपने रुतबे का इस्तेमाल कर शाहजहां पर दबाव बनाया और दोबारा मंदिर का निर्माण कराया। हालांकि जब औरंगजेब बादशाह बना तो उसने फिर से मंदिर तुड़वाकर मस्जिद का निर्माण करा दिया।
पैसा इतना कि मिल गया जगत सेठ का खिताब
बंगाल के कारोबारी मानिक चंद का जलवा ऐसा था कि मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने मानकि चंद को सेठ का खिताब दिया था। जो कि बाद में जगत सेठ के नाम से मशहूर हुआ। और यह टाइटिल उनके परिवार के लोग भी इस्तेमाल करने लगे। मानिक चंद बंगाल के नवाब मुर्शिद कुली खां का कैशियर था। और दोनों ने मिलकर बंगाल की राजधानी मुर्शिदाबाद का निर्माण किया। कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मानिक चंद की दौलत ब्रिटेन की इकोनॉमी से भी ज्यादा थी।
