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क्या बंद हो जाएंगे एटीएम? यूपीआई के क्रेज ने बदला लोगों के कैश निकालने का तरीका!

डिजिटल इंडिया के दौर में यूपीआई (UPI) के बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों की कैश पर निर्भरता काफी हद तक कम कर दी है। चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, हर जगह ऑनलाइन पेमेंट का बोलबाला है। ऐसे में सवाल उठता है क्या वाकई एटीएम बंद होने की कगार पर हैं?

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क्या बंद हो जाएंगे एटीएम? यूपीआई के क्रेज ने बदला लोगों के कैश निकालने का तरीका!

भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के आने के बाद से डिजिटल ट्रांजैक्शन की दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज छोटी से छोटी दुकान से लेकर बड़े-बड़े शोरूम तक, हर जगह क्यूआर कोड (QR Code) स्कैनर नजर आते हैं। सब्जी खरीदने से लेकर कैब का किराया चुकाने तक, लोग अब बटुए में नकदी रखने के बजाय अपने स्मार्टफोन से तुरंत भुगतान करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यूपीआई के इस बेतहाशा क्रेज ने एटीएम (ATM) से पैसे निकालने के ट्रेंड को पूरी तरह बदलकर रख दिया है और कैश विड्रॉल में भारी कमी देखने को मिल रही है।

NPCI के आंकड़े क्या बताते हैं?

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आंकड़े भी इस बात की तस्दीक करते हैं कि बीते कुछ सालों में ऑनलाइन पेमेंट्स में कई गुना इजाफा हुआ है, जबकि एटीएम से निकासी की रफ्तार सुस्त पड़ी है। लोग अब सिर्फ बहुत जरूरी होने पर या इमरजेंसी की स्थिति में ही एटीएम का रुख कर रहे हैं। पहले जहां महीने में कई बार एटीएम से नकदी निकाली जाती थी, अब वही काम एक ही क्लिक में सीधे बैंक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर होकर हो जाता है। इससे न तो लंबी लाइनों में खड़े होने का झंझट रहता है और न ही खुल्ले पैसों की किल्लत होती है।

क्या ATM बंद हो जाएंगे?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यूपीआई के इस दबदबे के कारण देश में एटीएम पूरी तरह बंद हो जाएंगे? विशेषज्ञों और बैंकिंग इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ऐसा फिलहाल नहीं होने वाला है। भले ही डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा हो, लेकिन भारत में नकद पैसों (Cash) की अहमियत पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती। देश के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में आज भी इंटरनेट कनेक्टिविटी या स्मार्टफोन की उपलब्धता एक चुनौती है, जहां लोग दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह कैश पर ही निर्भर हैं।

हालांकि, यूपीआई के बढ़ते असर के कारण बैंकों की रणनीति में बदलाव जरूर देखने को मिल रहा है। बैंक अब नए एटीएम लगाने की रफ्तार धीमी कर रहे हैं या फिर घाटे में चल रहे एटीएम काउंटरों को बंद कर रहे हैं। साथ ही, आधुनिक एटीएम मशीनों को सिर्फ पैसे निकालने तक सीमित न रखकर 'कैश डिपॉजिट' (CRMI Machine) और अन्य बैंकिंग सुविधाओं के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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