Gem and Jewelry Export: सरकार ने सोमवार (30 मार्च 2026) को रत्न और आभूषण उद्योग को कुछ जरूरी नियमों को पूरा करने के लिए 30 दिन की अतिरिक्त समय सीमा देने का फैसला किया है। यह कदम विशेष रूप से पश्चिम एशिया में हाल ही में उत्पन्न हुए संकट के कारण इस क्षेत्र को मदद पहुंचाने के लिए उठाया गया है। पश्चिम एशिया भारत के रत्न और आभूषण निर्यात का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से फरवरी तक इस क्षेत्र का निर्यात लगभग 26.2 अरब डॉलर रहा है।
निर्यातकों को राहत देने का उद्देश्य
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस उपाय का मुख्य उद्देश्य उद्योग के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना और मौजूदा समय में सामने आने वाली परिचालन कठिनाइयों को कम करना है। पिछले महीने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले के कारण पश्चिम एशिया में हवाई और समुद्री माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इस स्थिति ने निर्यातकों के कामकाज को काफी प्रभावित किया।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा कि पश्चिम एशिया में हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं के जवाब में रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए विशेष सुविधाएं लागू की गई हैं। इसके तहत एचबीपी-2023 के अध्याय 4 के प्रावधानों के अनुसार, कुछ विशिष्ट श्रेणियों के निर्यात और आयात की समय सीमा को बिना किसी शुल्क या आवेदन के 30 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। अध्याय 4 में शुल्क छूट और माफी योजनाओं से जुड़ी बातें शामिल हैं।
किन मामलों में बढ़ी समय सीमा
इस नई छूट के तहत कई मामलों में समय सीमा बढ़ाई गई है। इसमें प्रमाणन और ग्रेडिंग के लिए आयातित हीरों का पुनः निर्यात, विदेशी खरीदार से प्राप्त कीमती धातुओं के बदले निर्यात, प्रदर्शनियों के लिए भेजे गए आभूषणों का पुनः आयात और सोने के मामलों में निर्यात शामिल हैं। विशेष रूप से, प्रमाणन और ग्रेडिंग के लिए भेजे गए हीरों के पुनः निर्यात की समय सीमा 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है। इसी तरह, विदेशी खरीदार से प्राप्त आपूर्ति के आधार पर किए जाने वाले निर्यात की अवधि भी 90 दिन से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है। इसके अलावा, विदेश में आयोजित होने वाली प्रदर्शनियों या उनमें भाग लेने के लिए भेजे गए आभूषणों के पुनः आयात की समय सीमा को मौजूदा अवधि के अतिरिक्त 30 दिन बढ़ा दिया गया है।
प्रक्रिया आसान, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं
सरकार ने यह भी साफ किया कि निर्यातकों को इस राहत का लाभ लेने के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है और न ही किसी शुल्क का भुगतान करना होगा। सीमाशुल्क अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित निर्यात और आयात लेन-देन को विवरणों के सत्यापन के बाद अनुमति दें। इससे उद्योग को बिना अतिरिक्त दबाव के अपने कामकाज को सुचारू रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी।
उद्योग ने कदम का स्वागत किया
रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के पूर्व चेयरमैन कोलिन शाह ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि यह समय पर लिया गया राहत उपाय है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशियाई देशों में निर्यात करने में वर्तमान में काफी कठिनाइयां आ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होगी। इस अतिरिक्त समय से निर्यातकों को लेन-देन पूरे करने में आसानी होगी और वैश्विक परिस्थितियों के कारण होने वाली देरी कम होगी। साथ ही, यह उद्योग में स्थिरता बनाए रखने और व्यापार में निश्चितता बढ़ाने में भी मदद करेगा।
