Old vs New Tax Regime: देश में दो टैक्स रिजीम (टैक्स सिस्टम या टैक्स व्यवस्था) हैं - एक नई और एक पुरानी। पुरानी टैक्स रिजीम में कई तरह छूट मिलती हैं, जबकि नए टैक्स रिजीम में कई टैक्स बेनेफिट नहीं मिलते। नई टैक्स रिजीम के तहत कई डिडक्शंस उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए हो सकता है कि कई टैक्सपेयर उन निवेश ऑप्शनों में निवेश रोकने की सोच रहें हों, जिनमें टैक्स बेनेफिट नहीं मिलता। हालाँकि इन ऑप्शनों में निवेश को सिर्फ इसलिए नहीं रोका जाना चाहिए क्योंकि इनसे कोई टैक्स बेनेफिट नहीं मिलेगा। ये आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग में अन्य अहम उद्देश्यों की पूर्ति कर सकते हैं। आगे जानिए इन ऑप्शनों के बारे में।
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पब्लिक प्रोविडंट फंड (पीपीएफ)
पीपीएफ पूरी तरह से टैक्स फ्री रहता है। इसमें किया गया निवेश, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि भी टैक्स फ्री रहती है। पीपीएफ रिटायरमेंट फंड बनाने का एक अच्छा तरीका है। यदि आपके पास निवेश करने लायक एक्स्ट्रा पैसा है तो इस टैक्स सेविंग स्कीम में निवेश करना जारी रखें।
लाइफ इंश्योरेंस का प्रीमियम
जीवन बीमा का मकसद पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर फाइनेंशियल सपोर्ट ऑफर करना है। यह बेनेफिट और सुरक्षा खास कर टर्म बीमा योजनाओं में मिलती है जो कम कीमत पर बड़ा कवर देते हैं। अगर प्रीमियम पर कोई टैक्स बेनेफिट नहीं है तो भी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम देना बंद न करें
इस कवर को जारी रखना टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी जितना ही महत्वपूर्ण है। अपना मेडिकल कवर न रोकें। कोविड ने हमें चार साल पहले बता दि था कि मेडिकल इंश्योरेंस न होने पर घर की वित्तीय हालत बिगड़ सकती है।
एनपीएस में बरकरार रखें निवेश
भले ही नई टैक्स रिजीम के तहत धारा 80सी के तहत कोई कटौती नहीं है, लेकिन धारा 80सीसीडी(2) के तहत एनपीएस में योगदान पर टैक्स बेनेफिट मिलता रहेगा। यदि आपने अपने एम्प्लॉयर के जरिए एनपीएस का ऑप्शन चुना है, तो टैक्स बेनेफिट प्राप्त करने के लिए योजना में योगदान जारी रखें।
