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चेक बाउंस हुआ तो खानी पड़ सकती है जेल की हवा, जानिए कोर्ट-कचहरी और जुर्माने का पूरा नियम

बैंकिंग प्रक्रिया में चेक का काफी महत्व है। इसलिए इसकी विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। इसलिए चेक इश्यू करने से पहले काफी सावधानी बरतनी चाहिए।

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चेक बाउंस

हाल ही में राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला काफी सुर्खियां बटोरा था। चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को दिल्ली के तिहाड़ जेल जाना पड़ा था। यह स्थिति किसी के साथ भी हो सकती है। इसलिए चेक इश्यू करने से पहले काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर अकाउंट में पैसा नहीं हो तो चेक बिल्कुल जारी नहीं करें। चेक बाउंस का मतलब ऐसी स्थिति से है, जब कोई व्यक्ति अपने बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे न होने या किसी अन्य समस्या (जैसे, गलत हस्ताक्षर) के कारण अपने चेक को कैश नहीं करवा पाता है। आइए जानते हैं कि भारत में चेक बाउंस को लेकर क्या है नियम?

क्या है भारत में चेक बाउंस का नियम?

भारत में, चेक बाउंस होने के मामलों को Negotiable Instruments Act की धारा 138 के तहत कवर किया जाता है। यह धारा चेक बाउंस होने को एक अपराध मानती है, लेकिन लोगों को हमेशा इसकी जानकारी नहीं होती। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि लोगों का बैंकिंग प्रक्रियाओं पर भरोसा बना रहे और चेक के इस्तेमाल में किसी भी तरह की धोखाधड़ी न हो। हालांकि, चेक बाउंस के सभी मामलों को आपराधिक मामला नहीं माना जाता है, क्योंकि इसके लिए कुछ खास शर्तों का पूरा होना जरूरी है।

क्या तुरंत हो जाती है जेल की सजा?

चेक बाउंस करने के साथ सजा या जुर्माना का प्रावधान नहीं है। बैंकिंग एक्सपर्ट का कहना है कि अगर चेक बाउंस हो जाता है, तो चेक डिसऑनर होने की जानकारी मिलने के 30 दिनों के अंदर, चेक पाने वाले (Payee) को चेक जारी करने वाले (Drawer) को पेमेंट की मांग का एक लिखित नोटिस देना होता है। नोटिस जारी होने के बाद, चेक जारी करने वाले के पास पेमेंट करने के लिए 15 दिन का समय मिलता है। अगर वह तय समय के अंदर ऐसा नहीं कर पाता है, तो चेक पाने वाला कोर्ट में शिकायत कर सकता है। इसके बाद कार्रवाई शुरू होती है।

सेक्शन 138 कब लागू होता है?

सेक्शन 138 केवल उन स्थितियों में लागू होता है, जहां चेक किसी व्यक्ति के किसी तरह के कर्ज या कानूनी दायित्व को दिखाता हो। ऐसी स्थितियों में, जब चेक किसी तोहफे के तौर पर दिया गया हो या दोनों पक्षों के बीच कोई कानूनी रिश्ता न हो, तो सेक्शन 138 लागू नहीं हो सकता। तकनीकी गलतियों को इस कानून के तहत आपराधिक उल्लंघन नहीं माना जा सकता। हर मामले का मूल्यांकन तथ्यों और इरादों के आधार पर किया जाता है।

जिस व्यक्ति ने डिसऑनर हुआ चेक जारी किया है, उसे गिरफ्तार किया जा सकता है और उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इस व्यक्ति को दो साल तक की जेल या चेक की कीमत से दोगुनी रकम का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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