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IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामला: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कही ये बात

IDFC First Bank Fraud Case: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुई 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पर केंद्रीय बैंक लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घटना सीमित है और इसमें कोई सिस्टेमिक समस्या या बैंकिंग सिस्टम की कमजोरी शामिल नहीं है।

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आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी (तस्वीर-PTI)

Photo : PTI

IDFC First Bank Fraud Case : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार (23 फरवरी 2025) को कहा कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हाल ही में हुई 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पर केंद्रीय बैंक नजर बनाए हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई सिस्टेमिक समस्या नहीं है और यह केवल एक सीमित घटना है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को यह जानकारी साझा की थी कि उसके कुछ कर्मचारी और अन्य लोग मिलकर हरियाणा सरकार के खातों से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल थे। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) वी. वैद्यनाथन ने कहा कि यह धोखाधड़ी एक निश्चित यूनिट और एक ग्राहक समूह तक ही सीमित थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह कोई सिस्टम या रिपोर्टिंग की गलती नहीं थी, बल्कि कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत से हुई अवैध गतिविधि थी।

आरबीआई की प्रतिक्रिया

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस घटना के बाद पत्रकारों से बातचीत में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि हम घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यह कोई सिस्टेमिक समस्या नहीं है। बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह घटना बैंकिंग प्रणाली के सामान्य कामकाज को प्रभावित नहीं करती।

शेयर बाजार पर प्रभाव

धोखाधड़ी के खुलासे के तुरंत बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर सोमवार को 20 प्रतिशत तक गिरकर 66.85 रुपये पर आ गया। इसी समय, हरियाणा सरकार ने कथित धोखाधड़ी के कारण एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को सरकारी काम से हटा दिया। इस कदम से एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर भी 7.62 प्रतिशत गिरकर 950.50 रुपये पर आ गया।

बैंक की कार्रवाई

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि उन्होंने संदिग्ध कर्मचारियों को तुरंत निलंबित कर दिया है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक वरिष्ठ प्रबंधन का इस मामले में कोई संलिप्तता सामने नहीं आई है। बैंक ने भरोसा दिलाया कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

घटना का सार

इस धोखाधड़ी की घटना से यह साफ हुआ कि बैंकिंग प्रणाली में छोटी लेकिन गंभीर चूक होने पर भी बड़ी रकम की हेराफेरी हो सकती है। हालांकि आरबीआई और बैंक मैनेजमेंट ने इसे एक सीमित घटना बताया है और आश्वासन दिया है कि आम ग्राहकों के पैसे सुरक्षित हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घटनाओं से सीख लेकर बैंकिंग सुरक्षा और नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत करना जरूरी है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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