Chartered Accountants : भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रोफेशनल्स की टॉप संस्था, भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (ICAI) ने बुधवार को नई वैश्विक नेटवर्किंग दिशानिर्देश अधिसूचित किए। इन दिशानिर्देशों का मकसद घरेलू सीए फर्मों को बड़े नेटवर्क बनाने और वैश्विक स्तर पर सहयोग करने का रास्ता खोलना है। ICAI की अधिसूचना के अनुसार भारत में संचालित किसी भी 'चार्टर्ड अकाउंटेंट के वैश्विक नेटवर्क' को उनकी भारतीय गतिविधियों के संबंध में आईसीएआई के नियामक दायरे में लाना होगा। इसका मतलब यह है कि विदेशी सीए नेटवर्क यदि भारतीय फर्मों के साथ सहयोग करना चाहते हैं, तो उन्हें ICAI में रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा। ICAI के अध्यक्ष प्रसन्न कुमार डी ने कहा कि यह नया ढांचा देश में पेशेवर नेटवर्क विकसित करने के लिए एक सक्षम वातावरण तैयार करेगा। उन्होंने बताया कि इससे घरेलू फर्मों को वैश्विक व्यापार के उभरते परिदृश्य में समान अवसर मिलेंगे। प्रसन्न कुमार के अनुसार, यह कदम भारतीय फर्मों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, नवीन ज्ञान और उभरती तकनीक तक पहुंच प्रदान करेगा और उनकी पेशेवर क्षमता को मजबूत करेगा।
घरेलू फर्मों के लिए वैश्विक अवसर
इस पहल का उद्देश्य भारत में घरेलू स्तर पर बड़ी सीए फर्मों के विकास को बढ़ावा देना है। सरकार भी ऐसे प्रयास कर रही है ताकि भारतीय फर्में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। ICAI के पास वर्तमान में देशभर में पांच लाख से अधिक सदस्य हैं। इस नए नेटवर्किंग ढांचे से घरेलू फर्मों को वैश्विक साझेदारियों के लाभ मिलेंगे और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपने संचालन को ढालने में मदद मिलेगी।
सूचना प्रणाली ऑडिट मानकों का अनावरण
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक ICAI ने यह भी कहा कि वह फरवरी के अंत तक सूचना प्रणाली ऑडिट मानक (ISAS) जारी करेगा। कुल 11 नए मानक डिजिटल पारिस्थितिकी में ऑडिट प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए बनाए गए हैं। इन मानकों का उद्देश्य ऑडिट प्रणाली नियंत्रण और वित्तीय रिपोर्टिंग की शुचिता के बीच सीधे संबंध को स्थापित करना है। ICAI ने स्पष्ट किया कि आज के दौर में, जब वित्तीय प्रणालियाँ ERP-आधारित, स्वचालित और क्लाउड-संबद्ध हो गई हैं, मजबूत सूचना प्रणाली नियंत्रण डिजिटल वित्तीय रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता को बढ़ाता है। इससे हितधारकों का विश्वास भी मजबूत होता है।
डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी में विश्वास
नई ISAS मानकों के जरिए ऑडिटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल वित्तीय प्रणाली में जो नियंत्रण हैं, वे मजबूत और पारदर्शी हों। इससे न केवल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि कंपनियों के हितधारकों जैसे निवेशकों, नियामकों और शेयरधारकों का भरोसा भी बढ़ेगा। ICAI की यह पहल दो बड़े मकसद पूरे करती है। एक तरफ घरेलू सीए फर्मों के लिए वैश्विक नेटवर्किंग के अवसर बढ़ाना और दूसरी तरफ डिजिटल वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना। यह कदम पेशेवरों और व्यवसाय दोनों के लिए लाभकारी होगा और भारत को वैश्विक वित्तीय सेवाओं में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
