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Credit Report देखकर हो जाते हैं कंफ्यूज? आसान भाषा में समझें इस डॉक्यूमेंट का हर एक शब्द

क्रेडिट रिपोर्ट केवल एक डॉक्यूमेंट नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय पहचान है। इसे नियमित रूप से चेक करना और गलतियों को समय रहते सुधारना आपको भविष्य में बेहतर लोन और कम ब्याज दर पाने में मदद कर सकता है।

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Credit Report (Photo: iStock)

How to read credit report: अक्सर लोग जब लोन या क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के लिए आवेदन करते हैं, तब ही अपना क्रेडिट स्कोर (Credit Score) देखते हैं। लेकिन केवल स्कोर ही सब कुछ नहीं होता, उसके पीछे मौजूद पूरी क्रेडिट रिपोर्ट को समझना भी बेहद जरूरी है। क्रेडिट रिपोर्ट (Credit Report) आपके फाइनेंशियल बिहेवियर का पूरा रिकॉर्ड होती है, जिसे बैंक और लेंडर्स बहुत ध्यान से देखते हैं। इस रिपोर्ट को कैसे रीड किया जाना चाहिए इस आर्टिकल में बताने जा रहे हैं-

Credit Report

Credit Report (Photo: iStock)

पर्सनल डिटेल्स

क्रेडिट रिपोर्ट में सबसे पहले आपको अपनी पर्सनल डिटेल्स चेक करनी चाहिए। इसमें आपका नाम, जन्मतिथि, PAN, पता और संपर्क जानकारी शामिल होती है। अगर यहां कोई छोटी सी भी गलती है तो यह भविष्य में लोन मिलने में परेशानी पैदा कर सकती है, इसलिए इसे अपनी पर्सनल डिटेल्स को बारीकी से चेक करें।

क्रेडिट अकाउंट्स सेक्शन

इसके बाद क्रेडिट अकाउंट्स सेक्शन को चेक किया जाना चाहिए। इसमें आपके सभी लोन और क्रेडिट कार्ड की जानकारी होती है। इसमें यह भी दिखता है कि आपने कितना लोन लिया, कितना बाकी है और आपने भुगतान कैसे किया है। एक तरह से यह सेक्शन आपकी क्रेडिट हिस्ट्री की पूरी तस्वीर दिखाता है।

रिपेमेंट हिस्ट्री

इसके बाद रिपेमेंट हिस्ट्री भी इस रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसमें हर महीने के आधार पर दिखता है कि आपने EMI या क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरा या नहीं। एक भी लेट पेमेंट आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर असर डाल सकता है, जबकि समय पर भुगतान आपकी साख को मजबूत करता है।

क्रेडिट स्कोर

क्रेडिट रिपोर्ट में अब बारी क्रेडिट स्कोर की आती है। आपका क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। आमतौर पर 750 से ऊपर का स्कोर अच्छा माना जाता है। हालांकि, यह सिर्फ एक नंबर है—असल मायने उस बिहेवियर के हैं जो इस स्कोर के पीछे होता है, जैसे आपकी भुगतान आदतें और क्रेडिट उपयोग।

क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो

इसके बाद क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो (Credit utilization ratio) भी एक अहम फैक्टर है। यह बताता है कि आप अपनी कुल लिमिट का कितना हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर यह बहुत ज्यादा है, तो लेंडर्स को जोखिम लग सकता है। इसलिए इसे 30–40% के आसपास रखना बेहतर माना जाता है।

इन्क्वायरी सेक्शन

इसके अलावा इन्क्वायरी सेक्शन में हर बार का रिकॉर्ड होता है जब आपने लोन या कार्ड के लिए आवेदन किया। ध्यान रहे बहुत ज्यादा आवेदन करने से आपकी प्रोफाइल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

आखिर में अगर कहीं डिफॉल्ट या सेटलमेंट दिखता है, तो यह लेंडर्स के लिए एक बड़ा रेड फ्लैग होता है। भले ही यह एक पुराना मामला ही क्यों न हो।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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