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सेविंग अकाउंट पर भी मिलेगा FD वाला ब्याज, बस करना होगा काम

क्या आप जानते हैं कि आपके साधारण सेविंग अकाउंट में पड़ा पैसा आपको FD जितना मुनाफा दे सकता है? अक्सर हम बचत खाते में कम ब्याज की वजह से नुकसान उठाते हैं, लेकिन 'ऑटो-स्वीप' (Auto-Sweep) एक ऐसी जादुई बैंकिंग सर्विस है जो आपके एक्स्ट्रा बैलेंस को अपने आप एफडी में बदल देती है।

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Saving Account

अक्सर हम अपनी बचत का बड़ा हिस्सा सेविंग अकाउंट में ही छोड़ देते हैं, जहां हमें सालाना मात्र 2.7% से 3% तक का ब्याज मिलता है। दूसरी ओर, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर बैंक 7% से 8% तक का ब्याज देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आप अपने सेविंग अकाउंट के पैसे पर भी एफडी जितना मोटा मुनाफा कमा सकते हैं? इसके लिए आपको बैंक के चक्कर काटने या अलग से एफडी खुलवाने की जरूरत नहीं है। बैंकिंग जगत में इसे 'ऑटो-स्वीप फैसिलिटी' (Auto-Sweep Facility) या 'स्वीप-इन एफडी' कहा जाता है। यह एक ऐसी स्मार्ट सुविधा है जो आपके साधारण बैंक खाते को एक 'पॉवरफुल' इन्वेस्टमेंट टूल में बदल देती है।

क्या है ऑटो-स्वीप फैसिलिटी और यह कैसे काम करती है?

ऑटो-स्वीप सुविधा का सीधा सा मतलब है पैसे का एक हिस्से से दूसरे हिस्से में अपने आप चले जाना। जब आप अपने सेविंग अकाउंट में यह सर्विस एक्टिवेट कराते हैं, तो आपको एक 'थ्रेसहोल्ड लिमिट' (Threshold Limit) तय करनी होती है। मान लीजिए आपने यह लिमिट 25,000 रुपये तय की है। अब जैसे ही आपके खाते में बैलेंस 25,000 रुपये से ऊपर जाएगा (मान लीजिए 60,000 रुपये हो गया), तो ऊपर के अतिरिक्त 35,000 रुपये अपने आप एफडी में बदल जाएंगे। सबसे अच्छी बात यह है कि इस 35,000 रुपये पर आपको सेविंग अकाउंट के बजाय एफडी की ऊंची दर से ब्याज मिलना शुरू हो जाएगा, जबकि बाकी के 25,000 रुपये पर सामान्य ब्याज मिलता रहेगा।

इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा इसकी 'लिक्विडिटी' है। आम एफडी में अगर आप मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालते हैं, तो आपको पेनाल्टी देनी पड़ती है। लेकिन स्वीप-इन एफडी में ऐसा नहीं है। अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है और आप चेक काटते हैं या एटीएम से पैसा निकालते हैं, तो बैंक सबसे पहले आपके सेविंग अकाउंट का बैलेंस इस्तेमाल करेगा। अगर वहां पैसा कम पड़ता है, तो एफडी से उतना ही हिस्सा अपने आप टूटकर आपके खाते में आ जाएगा। इस प्रक्रिया को 'रिवर्स स्वीप' कहते हैं। इसमें आपको केवल उतने ही हिस्से पर ब्याज का नुकसान होता है जितना आपने समय से पहले निकाला है, बाकी बची हुई रकम पर एफडी वाला ब्याज मिलता रहता है।

इसे एक्टिवेट कैसे करें?

ज्यादातर बड़े बैंक जैसे SBI, HDFC, ICICI और PNB अपने ग्राहकों को यह सुविधा देते हैं। आप नेट बैंकिंग या मोबाइल ऐप के जरिए खुद इसे इनेबल कर सकते हैं, या फिर अपनी बैंक शाखा में जाकर एक फॉर्म भरकर इसे शुरू करवा सकते हैं। इसके लिए कोई अलग से चार्ज नहीं लिया जाता। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जिनका पैसा खाते में पड़ा रहता है लेकिन वे उसे लंबी अवधि के लिए लॉक नहीं करना चाहते।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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