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एक व्यक्ति के पास कितने Saving Account होने चाहिए? ज्यादा बैंक खाते खोलना फायदे का सौदा है या नुकसान

Limit of savings accounts per person in India: भारत में एक व्यक्ति के पास कितने सेविंग अकाउंट हो सकते हैं?क्या आपके मन में भी यह सवाल आता है। अगर हां तो आपको इसी सवाल का जवाब बैंकिंग नियमों के साथ बताने जा रहे हैं।

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आपके पास कितने सेविंग अकाउंट (Photo: iStock)

Limit of savings accounts per person in India: बहुत से लोग अपनी अलग-अलग जरूरतों के लिए एक से ज्यादा बैंक खाते खोलते हैं। जैसे सैलरी के लिए एक अकाउंट, बचत के लिए दूसरा और ऑनलाइन भुगतान के लिए तीसरा अकाउंट। ऐसे में कई लोगों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि क्या एक व्यक्ति कई सेविंग अकाउंट रख सकता है और इसकी कोई सीमा है या नहीं। अगर आपके मन में भी सेविंग अकाउंट को लेकर यही सवाल है तो इस आर्टिकल में आपको इस सवाल का ही जवाब देने जा रहे हैं-

एक से ज्यादा सेविंग अकाउंट

भारत में कोई भी व्यक्ति एक से ज्यादा सेविंग अकाउंट रख सकता है। इसमें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है। बैंकिंग नियमों के अनुसार, एक भारतीय व्यक्ति कितने भी सेविंग अकाउंट खुलवा सकता है, इसके लिए किसी तरह की कोई लिमिट नहीं है। हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि किसी भी व्यक्ति को 3 से ज्यादा सेविंग अकाउंट नहीं रखने चाहिए, क्योंकि इन्हें एक साथ मैनेज करना काफी मुश्किल हो जाता है।

एक ही बैंक में दो सेविंग अकाउंट

लोगों के मन में अक्सर यह सवाल भी रहता है कि क्या एक ही बैंक में दो सेविंग अकाउंट खुलवाए जा सकते हैं? इस सवाल का जवाब भी हां में दिया जा सकता है। कई बैंक अपने ग्राहकों को मल्टीपल अकाउंट की सुविधा देते हैं। लेकिन बैंक ग्राहक को किसी स्पेसिफिक बैंक और उसकी पॉलिसी को लेकर उसकी ऑफिशियल वेबसाइट से ही जानकारी चेक करनी चाहिए।

मल्टीपल सेविंग अकाउंट क्यों रखे जाते हैं

सवाल यह भी कि एक से ज्यादा सेविंग अकाउंट आखिर क्यों खुलवाएं जाते हैं। मल्टीपल सेविंग अकाउंट को लेकर हर व्यक्ति की कुछ खास जरूरत हो सकती है-

ट्रैकिंग गोल्स

अलग-अलग सेविंग अकाउंट में पैसे रखने से व्यक्ति अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों को आसानी से ट्रैक कर सकता है। उदाहरण के लिए यात्रा, इमरजेंसी फंड या शिक्षा के लिए अलग अकाउंट रखने से यह साफ दिखता है कि किस लक्ष्य के लिए कितना पैसा बचा है।

बचत की आदत को बढ़ावा

अगर आय का एक हिस्सा अलग-अलग सेविंग अकाउंट में ऑटोमैटिक ट्रांसफर कर दिया जाए तो नियमित बचत करना आसान हो जाता है। इससे अनावश्यक खर्च करने की आदत भी कम होती है और वित्तीय अनुशासन बना रहता है।

वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद

कई सेविंग अकाउंट रखने से अलग-अलग लक्ष्यों के लिए बचत को व्यवस्थित तरीके से मैनेज किया जा सकता है। इससे जाना जा सकता है कि सेविंग योजना सही दिशा में जा रही है या नहीं।

कार्ड इस्तेमाल में फ्लेक्सिबिलिटी

कई बैंकों में डेबिट कार्ड से पैसे निकालने की दैनिक सीमा होती है। ऐसे में अगर एक अकाउंट की लिमिट पूरी हो जाए तो दूसरे सेविंग अकाउंट से पैसे निकालकर जरूरत के समय काम चलाया जा सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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