भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और इस प्रगति को रफ्तार देने में 'ऊर्जा' (Energy) की बड़ी भूमिका है। जब हम ऊर्जा की बात करते हैं, तो आम आदमी के लिए इसका सबसे सीधा मतलब होता है उसके किचन में रखा 'लाल सिलेंडर'। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी (LPG) उपभोक्ता बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में हर दिन कितने सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है? यह आंकड़ा न केवल आपको हैरान कर देगा, बल्कि यह भी बताएगा कि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी कितनी बड़ी चुनौती है।
हर रोज कितने सिलेंडर होते हैं इस्तेमाल
आंकड़ों की बात करें तो भारत में एलपीजी की मांग पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ी है। वर्तमान रिपोर्टों और खपत के पैटर्न को देखें तो भारत में हर दिन लगभग 15 से 20 लाख एलपीजी सिलेंडरों (14.2 किलोग्राम वाले) की खपत होती है। अगर इसे वजन में नापा जाए, तो भारत हर साल लगभग 28 से 30 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी का इस्तेमाल करता है। सुबह की पहली चाय से लेकर रात के खाने तक, देश के करोड़ों घरों में जलने वाले चूल्हे इसी भारी-भरकम सप्लाई चेन पर टिके हैं।
इतनी बड़ी खपत के पीछे सबसे बड़ा कारण है 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना'। इस योजना के आने के बाद से ग्रामीण भारत में एलपीजी की पहुंच लगभग 99% तक हो गई है। पहले जहां गांवों में लोग लकड़ी और कोयले पर निर्भर थे, अब वहां भी हर महीने करोड़ों सिलेंडरों की रिफिलिंग हो रही है। आज भारत में एलपीजी ग्राहकों की संख्या 30 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। यही वजह है कि हर दिन लाखों सिलेंडरों को बॉटलिंग प्लांट से निकालकर ट्रक और डिलीवरी वैन के जरिए गलियों-मोहल्लों तक पहुंचना दुनिया के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स में से एक माना जाता है।
एक दिन की रुकावट से कितना नुकसान
हालांकि, इतनी बड़ी खपत के साथ एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी है। भारत अपनी जरूरत की कुल एलपीजी का लगभग 55% से 60% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। हम मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों पर निर्भर हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या मिडिल-ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती है, तो इन लाखों सिलेंडरों की रोजाना सप्लाई पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं। अगर एक दिन भी जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो देश के 20 लाख घरों का चूल्हा प्रभावित हो सकता है। इसीलिए सरकार अब 'रणनीतिक भंडार' (Strategic Reserves) और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
केवल घरेलू रसोई ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सेक्टर (होटल, रेस्टोरेंट और इंडस्ट्री) में भी एलपीजी की दैनिक खपत बहुत ज्यादा है। नीले रंग के कमर्शियल सिलेंडरों की मांग भी पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। औद्योगिक कार्यों और बड़े होटलों में रोजाना हजारों टन गैस का उपयोग होता है। सरकार अब धीरे-धीरे शहरों में एलपीजी के विकल्प के तौर पर पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) को बढ़ावा दे रही है, ताकि सिलेंडरों की ढुलाई का खर्च कम किया जा सके और सड़कों पर ट्रकों का बोझ कम हो।
