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IKEA दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर कंपनी कैसे बनी?

महज 5 साल की उम्र में माचिस बेचने वाले इंग्वार काम्प्राड ने अपनी अनोखी सोच से 'IKEA' को दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर कंपनी बनाया। उनके 'फ्लैट-पैक' (DIY) मॉडल और कम कीमत में शानदार डिजाइन की रणनीति ने इस ब्रांड को ग्लोबल हब बना दिया।

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IKEA दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर कंपनी कैसे बनी?

आज के समय में जब भी कम कीमत में स्टाइलिश और बेहतरीन फर्नीचर की बात आती है, तो जुबान पर सबसे पहला नाम 'आइकिया' (IKEA) का आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की यह सबसे बड़ी फर्नीचर रिटेलर कंपनी कैसे बनी? इसके पीछे की कहानी बेहद प्रेरणादायक है, जो एक 5 साल के बच्चे के बिजनेस माइंडसेट से शुरू होती है। इस साम्राज्य को खड़ा करने वाले शख्स थे इंग्वार काम्प्राड (Ingvar Kamprad), जिन्होंने महज पांच साल की उम्र में माचिस की डिब्बी बेचने से अपने व्यापारिक सफर की शुरुआत की थी। अपनी कड़ी मेहनत, अनोखी सोच और ग्राहकों की जरूरत को समझने की कला के दम पर उन्होंने स्वीडन के एक छोटे से गांव से निकलकर पूरी दुनिया के दिलों पर राज किया।

कैसे हुई शुरुआत?

इंग्वार काम्प्राड का जन्म स्वीडन के एक साधारण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें बिजनेस की गजब की समझ थी। उन्होंने देखा कि शहर से थोक भाव में माचिस खरीदकर अगर गांव में खुदरा (Retail) बेची जाए, तो अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। माचिस के बाद उन्होंने पेन, ग्रीटिंग कार्ड, घड़ी और बीज जैसी चीजें भी बेचना शुरू कर दिया। जब वे 17 साल के हुए, तो उनके पिता ने पढ़ाई में अच्छे प्रदर्शन के लिए उन्हें कुछ पैसे इनाम में दिए। इंग्वार ने उन पैसों को फिजूलखर्च करने के बजाय साल 1943 में 'IKEA' नाम की कंपनी की नींव रखी। शुरुआत में यह कंपनी केवल पेन, पर्स और फ्रेम जैसी छोटी-मोटी चीजें डाक (Mail-Order) के जरिए बेचती थी।

ये था सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट

साल 1948 में इंग्वार ने आइकिया के पोर्टफोलियो में स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए फर्नीचर को शामिल किया, जो लोगों को काफी पसंद आया। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह फर्नीचर बिजनेस पर फोकस करने का फैसला किया। आइकिया की सफलता का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था उनका 'फ्लैट-पैक' (Flat-pack) और 'डू-इट-योरसेल्फ' (DIY) मॉडल। इंग्वार ने नोटिस किया कि फर्नीचर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बहुत ज्यादा आता है और सामान टूटने का डर भी रहता है। इसका हल निकालने के लिए उन्होंने ऐसा फर्नीचर डिजाइन करवाया जिसे आसानी से खोलकर (Dismantle) एक पतले बॉक्स में पैक किया जा सके और ग्राहक खुद घर ले जाकर उसे आसानी से असेंबल (जोड़) कर सकें। इस तरकीब ने शिपिंग लागत को भारी कम कर दिया, जिससे फर्नीचर बेहद सस्ता हो गया।

आइकिया का मुख्य मंत्र हमेशा से 'कम कीमत में बेहतरीन डिजाइन' देना रहा है। उन्होंने फर्नीचर को अमीरों की लग्जरी के बजाय आम लोगों की जरूरत और पहुंच में बदल दिया। इसके अलावा, आइकिया के बड़े-बड़े शोरूम्स का लेआउट भी इस तरह तैयार किया जाता है कि ग्राहक वहां पूरा घर सेटअप देख सकें और खरीदारी के साथ-साथ वहां के रेस्टोरेंट में स्वीडिश फूड का आनंद भी ले सकें। आज इंग्वार काम्प्राड भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका आइकिया ब्रांड दुनिया के दर्जनों देशों में सैकड़ों स्टोर्स के साथ सबसे बड़ा फर्नीचर हब बना हुआ है, जो दिखाता है कि एक छोटी सी सोच और सही रणनीति से कितना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया जा सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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