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भारत का पहला शेयर बाजार कैसे शुरू हुआ? जानिए BSE बनने की पूरी कहानी

क्या आप जानते हैं देश का सबसे पहला स्टॉक एक्सचेंज कब कहां और कैसे खुला था? या किन लोगों ने मिलकर इसे खोला था? अगर नहीं तो आइए बताते हैं BSE बनने की पूरी कहानी।

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भारत का पहला शेयर बाजार कैसे शुरू हुआ?

आज के समय में जब हम शेयर बाजार की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में चमचमाती इमारतें, कंप्यूटर स्क्रीन और लाखों-करोड़ों रुपये के डिजिटल ट्रांजैक्शन घूमने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत और पूरे एशिया का सबसे पुराना शेयर बाजार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), किसी आलीशान दफ्तर से नहीं बल्कि एक बरगद के पेड़ के नीचे से शुरू हुआ था? जी हां, यह कहानी बेहद दिलचस्प है। इसकी शुरुआत साल 1855 के आसपास हुई थी, जब मुंबई (तब बॉम्बे) में सिर्फ पांच लोग एक साथ मिलकर शेयर की ट्रेडिंग करते थे।

इन पांच लोगों में चार गुजराती और एक पारसी ब्रोकर शामिल थे। वे मुंबई के टाउन हॉल के सामने स्थित एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठा होते थे और वहां कंपनियों के शेयरों का सौदा किया करते थे। जैसे-जैसे इस काम में दलालों यानी ब्रोकर्स की संख्या बढ़ने लगी, वैसे-वैसे उनका ठिकाना भी बदलता रहा।

कैसे हुई थी शुरुआत?

बरगद के पेड़ के नीचे शुरू हुआ यह सिलसिला धीरे-धीरे आगे बढ़ा और जब ब्रोकर्स की संख्या बढ़कर करीब 150 से अधिक हो गई, तो उन्होंने एक आधिकारिक संगठन बनाने का फैसला किया। साल 1875 में इन्होंने मिलकर 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन' (The Native Share & Stock Brokers Association) की स्थापना की। इसके बाद भी कई सालों तक इनके पास अपना कोई स्थायी दफ्तर नहीं था और ये मुंबई की अलग-अलग गलियों में घूमकर ट्रेडिंग किया करते थे। आखिरकार, साल 1928 में इस एसोसिएशन ने मुंबई की दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) पर अपनी खुद की जमीन खरीदी और वहां अपनी इमारत का निर्माण शुरू किया। साल 1930 में यह इमारत बनकर तैयार हुई, जिसे आज हम 'फिरोज जीजीभॉय टावर्स' (Phiroze Jeejeebhoy Towers) के नाम से जानते हैं, जो बीएसई का मुख्य मुख्यालय है।

समय बदलने के साथ इस स्टॉक एक्सचेंज ने खुद को पूरी तरह से बदल लिया। साल 1986 में बीएसई ने 'सेंसेक्स' (Sensex) की शुरुआत की, जो भारत के शेयर बाजार का पहला इक्विटी इंडेक्स बना। सेंसेक्स देश की 30 सबसे बड़ी और आर्थिक रूप से मजबूत कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को मापता है और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर भी कहा जाता है। इसके बाद, साल 1995 में बीएसई ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया और अपनी सदियों पुरानी 'ओपन आउटक्राई' प्रणाली (जिसमें दलाल चिल्लाकर और हाथ के इशारों से सौदे करते थे) को बंद करके पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन ट्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया।

देश का सबसे पहला स्टॉक एक्सचेंज

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सिर्फ भारत का ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंजों में गिना जाता है। इस एक्सचेंज की स्पीड इतनी शानदार है कि यहां महज 6 माइक्रोसेकंड के भीतर कोई भी ट्रेड पूरा हो जाता है। एक बरगद के पेड़ के नीचे पांच लोगों से शुरू हुआ यह सफर आज इस मुकाम पर पहुंच चुका है कि बीएसई में 5,000 से अधिक कंपनियां लिस्टेड हैं और इसका कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन अरबों डॉलर को पार कर चुका है। बीएसई का इतिहास हमें सिखाता है कि कैसे एक छोटा सा विचार और सही दिशा में किया गया प्रयास वक्त के साथ मिलकर एक वैश्विक वित्तीय साम्राज्य का रूप ले सकता है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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