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EPFO मेंबर की मौत के बाद नॉमिनी किन-किन चीजों के लिए EPFO का पैसा कर सकता है क्‍लेम?

अगर किसी EPFO मेंबर की नौकरी के दौरान अचानक मौत हो जाती है, तो उसके परिवार पर आर्थिक संकट आ सकता है। ऐसे समय में यह जानना बहुत जरूरी होता है कि नॉमिनी को EPFO से जुड़े किन-किन लाभों का दावा करने का अधिकार मिलता है। सिर्फ पीएफ ही नहीं, बल्कि बीमा और पेंशन जैसे कई अहम फायदे EPFO के तहत मिलते हैं, जो परिवार को बड़ा आर्थिक सहारा देते हैं।

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EPFO WIthdrawal

अगर परिवार में कमाने वाले व्यक्ति की नौकरी के दौरान अचानक मृत्यु हो जाती है, तो यह सिर्फ भावनात्मक नुकसान नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति भी डगमगा जाती है। ऐसे समय में यह जानना बेहद जरूरी होता है कि कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार या नॉमिनी को किन-किन सरकारी और कंपनी से जुड़े लाभों का अधिकार मिलता है। आमतौर पर लोगों को सिर्फ पीएफ (PF) के बारे में जानकारी होती है, लेकिन हकीकत में इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण फायदे मिलते हैं, जो परिवार को आर्थिक सहारा दे सकते हैं। आइए आपको बताते नौकरीपेशा की मौत के बाद नॉमिनी किन किन चीजों के लिए क्लेम कर सकता है?

बकाया सैलरी और बोनस

सबसे पहले बात करते हैं बकाया सैलरी और बोनस की। कर्मचारी की मौत से पहले उसने जितने दिन काम किया होता है, उन दिनों की पूरी सैलरी उसके परिवार को मिलती है। इसके अलावा अगर कंपनी में बोनस, परफॉर्मेंस इंसेंटिव या वार्षिक बोनस का प्रावधान था, तो वह राशि भी नॉमिनी या कानूनी वारिस को दी जाती है। कई कंपनियां छुट्टी का नकदीकरण (Leave Encashment) भी करती हैं, यानी बची हुई छुट्टियों के बदले भी पैसा दिया जाता है।

पूरा पीएफ बैलेंस

इसके बाद आता है पूरा पीएफ बैलेंस (EPF क्लेम)। कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके EPF खाते में जमा पूरी राशि, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान शामिल होता है, ब्याज सहित नॉमिनी को मिल जाती है। अगर EPF खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज है, तो यह क्लेम EPFO की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन किया जा सकता है। ऑफलाइन क्लेम के लिए “कम्पोजिट क्लेम फॉर्म (मृत्यु)” भरकर नियोक्ता से सत्यापित कराकर पीएफ ऑफिस में जमा करना होता है। अगर नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो कानूनी वारिस उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) के साथ क्लेम कर सकते हैं।

ग्रेच्युटी

ग्रेच्युटी भी एक महत्वपूर्ण लाभ है। अगर कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को ग्रेच्युटी की राशि दी जाती है। खास बात यह है कि ग्रेच्युटी के लिए 5 साल की नौकरी की शर्त मृत्यु के मामले में लागू नहीं होती। ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी की अंतिम सैलरी और कुल नौकरी अवधि के आधार पर होती है। इसका फॉर्मूला है अंतिम सैलरी × 15/26 × नौकरी के साल। कानून के तहत अधिकतम 20 लाख रुपये तक ग्रेच्युटी दी जा सकती है, हालांकि कुछ कंपनियां इससे अधिक भी देती हैं।

EDLI बीमा (Employee Deposit Linked Insurance)

इसके अलावा EDLI बीमा (Employee Deposit Linked Insurance) का लाभ भी मिलता है। यह EPF से जुड़ा एक मुफ्त जीवन बीमा कवर है, जिसके लिए कर्मचारी को कोई प्रीमियम नहीं देना होता। इसका पूरा खर्च नियोक्ता वहन करता है। अगर नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को इस स्कीम के तहत कम से कम 2.5 लाख रुपये और अधिकतम 7 लाख रुपये तक की बीमा राशि मिल सकती है। यह राशि कर्मचारी की पिछले 12 महीनों की औसत सैलरी के आधार पर तय होती है। अच्छी बात यह है कि EDLI का क्लेम भी PF क्लेम के साथ ही एक ही प्रक्रिया में किया जा सकता है।

EPS पेंशन

एक और अहम सहारा है फैमिली पेंशन (EPS के तहत)। अगर कर्मचारी ने कम से कम 10 साल नौकरी की है और वह EPF के साथ-साथ EPS का सदस्य था, तो उसके परिवार को मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। इस पेंशन का उद्देश्य परिवार को नियमित आय प्रदान करना है। पति या पत्नी को यह पेंशन जीवन भर मिलती है। बच्चों को 25 साल की उम्र तक पेंशन मिलती है, जबकि दिव्यांग बच्चों को आजीवन पेंशन का प्रावधान है। अगर कर्मचारी अविवाहित था, तो उसके माता-पिता इस पेंशन के हकदार होते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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