देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रेस वार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), युवाओं से जुड़े मुद्दों और कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके फैसलों को आधिकारिक निर्णयों के आधार पर देखा जाना चाहिए।
धामी ने कहा कि 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की पूर्ण आयोग की बैठक हुई थी। उनके मुताबिक, बैठक के बाद जारी नोट को पूरे आयोग की मंजूरी मिली है। उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 को SIR को लेकर जारी मूल आदेश सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इसके बाद अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की समय-सारिणी भी आयोग की सहमति से तय की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी आंतरिक टिप्पणी को सीधे आयोग के अंतिम निर्णय में मतभेद के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि तथ्यों का निर्धारण हेडलाइन के बजाय पूरी फाइल और अंतिम संस्थागत निर्णय के आधार पर होना चाहिए।
SIR पर क्या बोले मुख्यमंत्री
धामी ने 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने बिहार में SIR को लेकर चुनाव आयोग की शक्ति और प्रक्रिया को वैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में स्वीकार किया है। उन्होंने Form-6 को लेकर भी आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण का जिक्र किया। उनके मुताबिक, अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मतदाताओं से दस्तावेज घर जाकर लेने की व्यवस्था की गई है। रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने की बात भी कही गई है।
ECINet को लेकर उठे सवालों पर धामी ने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराएगा। इसके लिए सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जिसमें IIT/IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाएगा। आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले जारी करने और मिनट्स उपलब्ध कराने के फैसले का भी उन्होंने उल्लेख किया।
कांग्रेस के आरोपों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष प्रशासनिक मुद्दों को राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। नकल के मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया है और पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
जमीन से जुड़े आरोपों पर धामी ने कहा कि यदि विपक्ष के पास नियमों के उल्लंघन से जुड़े प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। धामी ने कांग्रेस पर चुनावी हार के लिए कभी EVM तो कभी संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने का आरोप भी लगाया।
