AM Naik Journey : आज न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के अगर टॉप भुगतान वाले सीईओ की लिस्ट पर नजर डाली जाए तो उनमें अनिल मनीभाई नाईक (Anil Manibhai Naik) या एएम नाईक का जिक्र जरूर होगा। हाल ही में इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी Larsen & Toubro (L&T) ने नाईक के नॉन-एक्जेक्यूटिव चेयरमैन का पद छोड़ने का ऐलान किया, जबकि एक समय था कि नाईक को खुद लगता था कि वे केवल 1000 रु की लास्ट सैलेरी पर रिटायर होंगे।
नाईक का सफर काफी अनूठा रहा है। आगे जानिए कैसे नाईक 670 रु की नौकरी से सैकड़ों करोड़ की नेटवर्थ तक कैसे पहुंचे।
670 रु की सैलेरी से शुरुआत
नाईक की शुरुआती सैलेरी 670 रु थी। ETPanache को दिए 2018 को एक इंटरव्यू में नाईक ने स्वीकार किया था कि एक समय उन्हें लगता था कि वे 1000 रु की सैलेरी पर रिटायर होंगे। पर 670 रु शुरुआत के बाद कंफर्मेशन पर उन्हें 760 रु मिले। 6 महीने बाद उनकी सैलेरी हुई 950 रु और यूनियन एग्रीमेंट के बाद सैलेरी में 75 रु के इजाफे से उनका वेतन 1025 रु पहले ही साल में हो गया।
केवल दो जोड़ी जूते और 6 शर्ट
अपने इंटरव्यू में नाईक ने कहा था कि उनकी अलमारी में सिर्फ छह शर्ट, तीन सूट और दो जोड़ी जूते शामिल हैं।
कैसे बने अरबपति
कंपनी (एलएंडी) के सीईओ के पद तक अपनी ग्रोथ, जहां उन्होंने बतौर इंजीनियर नौकरी शुरू की थी, पर नाईक ने बताया था कि कर्मचारियों को स्टॉक ऑप्शन (Stock Option) एलॉट किए गए। कंपनी ने ग्रोथ की और इसी तरह शेयरों की वैल्यू भी बढ़ी। कर्मचारी लखपति और करोड़पति बन गए, जिनमें नाईक भी शामिल थे।
करेंगे ज्यादातर संपत्ति दान
2017-18 में नाईक को 137 करोड़ रु की सैलेरी मिली, जबकि कुछ साल पहले ही उनकी नेटवर्थ 400 करोड़ से अधिक हो गई थी। 2016 में ही उन्होंने कंपनी से हटने और अपनी 75 फीसदी दौलत दान करने का ऐलान कर दिया था।
अगर उनका बेटा और बहू अमेरिका से नहीं आए तो वे अपनी 100 फीसदी संपत्ति भी दान कर सकते हैं। अब जबकि उन्होंने नॉन-एक्जेक्यूटिव चेयरमैन का पद भी छोड़ दिया है, तो वे अपनी संपत्ति दान कर सकते हैं।
बता दें कि उनका बेटे और बहू के अलावा बेटी भी अपने पति के साथ अमेरिका में रहती हैं। अपने बच्चों को अमेरिका भेजने को नाईक ने गलती बताया था।
टॉप दानकर्ताओं में शामिल
2022 में 142 करोड़ रु के दान के साथ नाईक भारत में सबसे अधिक दान करने वालों की लिस्ट में 9वें नंबर पर थे।
