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FPO: सरकार करेगी FPO की समीक्षा, बनाने थे 10 हजार बनें 8875, होंगे अहम बदलाव

FPO Review: देशभर में अबतक लगभग 8,875 एफपीओ स्थापित हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 10,000 का था। कुछ एफपीओ ने एक करोड़ रुपये तक का कारोबार हासिल किया है । तीन साल की समर्थन अवधि समाप्त हो रही है, इसको देखते हुए रिव्यू का फैसला किया गया है।

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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

FPO Review:सरकार किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी। इन संस्थाओं के लिए तीन साल की समर्थन अवधि समाप्त हो रही है, इसको देखते हुए यह निर्णय किया गया है। एफपीओ योजना 2020 में शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य 6,865 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ 2024 तक 10,000 नये एफपीओ बनाने और उन्हें बढ़ावा देने का है। सरकार ने कार्यक्रम के तहत तीन साल के लिए प्रति एफपीओ 18 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। साथ ही इतना ही इक्विटी अनुदान और क्रेडिट गारंटी सुविधा भी दी।

क्यों हो रही है समीक्षा

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि सरकार किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के प्रदर्शन की समीक्षा करेगी।

चौहान ने यहां ‘दिल्ली हाट’ आईएनए में आयोजित मेले में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने वाले 55 एफपीओ से मिलने के बाद यह बयान दिया।एफपीओ योजना 2020 में शुरू की गई थी। इसका लक्ष्य 6,865 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान के साथ 2024 तक 10,000 नये एफपीओ बनाने और उन्हें बढ़ावा देने का है।सरकार ने कार्यक्रम के तहत तीन साल के लिए प्रति एफपीओ 18 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। साथ ही इतना ही इक्विटी अनुदान और क्रेडिट गारंटी सुविधा भी दी।हालांकि, मंत्री ने कहा कि एफपीओ के लिए परिणाम अलग-अलग रहे हैं। कुछ एफपीओ ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है जबकि अन्य को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कितने FPO

कृषि मंत्री ने कहा कि देशभर में अबतक लगभग 8,875 एफपीओ स्थापित हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 10,000 का था। कुछ एफपीओ ने एक करोड़ रुपये तक का कारोबार हासिल किया है और ऑनलाइन ऑर्डर प्राप्त कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने और किसानों की आय बढ़ाने में एफपीओ की भूमिका महत्वपूर्ण है।उन्होंने उत्पादों के विपणन में किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को स्वीकार किया।चौहान ने कहा कि एफपीओ के उत्पाद बड़ी निजी कंपनियों के उत्पादों की तुलना में बेहतर गुणवत्ता वाले हैं लेकिन उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए उन्हें एक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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