Disinvestment Plan Q1 FY27 : सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) में हिस्सेदारी बेचने और सरकारी संपत्तियों के मुद्रीकरण (Asset Monetisation) के जरिये ₹27,568.06 करोड़ जुटाए हैं। यह राशि सरकार के इस साल के ₹80,000 करोड़ के लक्ष्य का करीब 34 फीसदी है। यानी सरकार को वित्त वर्ष खत्म होने से पहले अभी ₹52,431.94 करोड़ और जुटाने है।
यह जानकारी खुद सरकार ने संसद में दी है। मंगलवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में सरकार ने बताया कि 29 जुलाई, 2026 तक जुटाई गई कुल राशि में ₹21,201.13 करोड़ विनिवेश (Disinvestment) और ₹6,366.93 करोड़ एसेट मॉनेटाइजेशन से आए हैं।
किन कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर जुटाया पैसा?
सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिये कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाया। इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और कोचिन शिपयार्ड शामिल हैं। इसके अलावा इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन के रणनीतिक विनिवेश से भी सरकार को आय हुई।
एसेट मॉनेटाइजेशन से भी हुई कमाई
सरकार ने सिर्फ PSU कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए भी ₹6,366.93 करोड़ जुटाए हैं। एसेट मॉनेटाइजेशन के तहत सरकार मौजूदा सरकारी परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग कर उनसे राजस्व हासिल करती है।
अभी कितना लक्ष्य पूरा हुआ?
बजट 2026-27 में सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन से ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। अब तक ₹27,568 करोड़ जुटाए जा चुके हैं, यानी लक्ष्य का करीब एक-तिहाई पूरा हुआ है। लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार को अब भी ₹52 हजार करोड़ से ज्यादा जुटाने होंगे।
समय सीमा बताने से किया इनकार
सरकार ने स्पष्ट किया कि लंबित विनिवेश सौदों को कब पूरा किया जाएगा, इसकी कोई तय समयसीमा नहीं है। सरकार के मुताबिक, किसी भी विनिवेश सौदे का समय कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें शेयर बाजार की स्थिति, घरेलू और वैश्विक आर्थिक माहौल, भू-राजनीतिक परिस्थितियां, निवेशकों की रुचि और प्रशासनिक तैयारियां शामिल हैं। ऐसे में पहले से कोई निश्चित तारीख तय करना संभव नहीं है।
लक्ष्य से पीछे रही है सरकार
हाल के वर्षों में सरकार कई बार विनिवेश से जुड़े बजटीय लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाई है। रणनीतिक विनिवेश में देरी, कंपनियों के वैल्यूएशन को लेकर मतभेद, नियामकीय मंजूरियों में समय लगना और बाजार की कमजोर परिस्थितियां इसकी प्रमुख वजह रही हैं। ऐसे में इस बार भी सरकार के सामने शेष ₹52 हजार करोड़ से ज्यादा जुटाने की चुनौती बनी हुई है।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें : सरकार का मास्टरस्ट्रोक! Electronics सेक्टर को 2041 तक टैक्स छूट, पैदा होंगे लाखों रोजगार
