भारत में अक्षय ऊर्जा और बिजली पहुंचाने वाले नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ बिजली के तार, कंडक्टर और सबस्टेशन में इस्तेमाल होने वाले एल्युमीनियम की मांग भी बढ़ने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में इसकी जरूरत और बढ़ सकती है। भारत में अक्षय ऊर्जा को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए बिजली पहुंचाने वाले नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ बिजली के तार, कंडक्टर, ट्रांसफॉर्मर और सबस्टेशन में इस्तेमाल होने वाले एल्युमीनियम की मांग बढ़ने की उम्मीद है। वेदांता एल्युमीनियम के मुताबिक, देश में जिस तेजी से बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार हो रहा है, उसे देखते हुए आने वाले समय में अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से खास किस्म के एल्युमीनियम की मांग बढ़ सकती है। कंपनी का कहना है कि वह इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए तैयार है।
लगातार बढ़ रही है क्षमता
दरअसल, भारत में अक्षय ऊर्जा से बिजली बनाने की क्षमता लगातार बढ़ रही है। लेकिन सिर्फ बिजली पैदा करना ही काफी नहीं है। इसे उन राज्यों और शहरों तक पहुंचाने के लिए मजबूत बिजली नेटवर्क की भी जरूरत होती है। इसी वजह से नई बिजली लाइनें, सबस्टेशन और ऊंचे वोल्टेज वाले गलियारे तैयार किए जा रहे हैं। ICRA के जून 2026 के आकलन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 से 2032 के बीच भारत में बिजली पहुंचाने के क्षेत्र में 5 से 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है। यह निवेश एल्युमीनियम की मांग को भी बढ़ावा दे सकता है।
बिजली पहुंचाने के काम में एल्युमीनियम को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी एक बड़ी वजह इसका वजन है। एल्युमीनियम, तांबे की तुलना में हल्का होता है और लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने वाली कई तरह की लाइनों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। बिजली की ऊपरी लाइनों के अलावा तार, कंडक्टर और केबल में भी इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए जैसे-जैसे देश का बिजली नेटवर्क बढ़ेगा, वैसे-वैसे एल्युमीनियम की जरूरत भी बढ़ सकती है।
अक्षय ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बिजली पहुंचाने वाले ढांचे को मजबूत करना और भी जरूरी हो गया है। खासकर उन राज्यों में जहां सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन ज्यादा होता है, वहां से बिजली को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए लंबी बिजली लाइनों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए ऐसे कंडक्टर चाहिए जो अलग-अलग मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों में लंबे समय तक बेहतर तरीके से काम कर सकें।
कहां-कहां होगा एल्युमिनियम का इस्तेमाल
इसी बढ़ती जरूरत को देखते हुए वेदांता एल्युमीनियम ने अलग-अलग काम के लिए एल्युमीनियम की कई किस्मों पर ध्यान दिया है। कंपनी के अनुसार, उसके 6201 मिश्रधातु का इस्तेमाल उन जगहों पर किया जा सकता है जहां ज्यादा मजबूती की जरूरत होती है। वहीं, AL59 किस्म को ऐसे वातावरण के लिए तैयार किया गया है जहां जंग से बचाव जरूरी होता है। 1350 और 1370 किस्मों का इस्तेमाल ज्यादा बिजली चालकता वाले कंडक्टर, ट्रांसफॉर्मर की कुंडली और सबस्टेशन में किया जाता है।
वेदांता एल्युमीनियम भारत के बड़े एल्युमीनियम उत्पादकों में शामिल है। कंपनी का कहना है कि उसने अलग-अलग उद्योगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अपने उत्पादों का विस्तार किया है। बिजली क्षेत्र में बढ़ती जरूरत को देखते हुए कंपनी का ध्यान ऐसे एल्युमीनियम उत्पादों पर है, जिनका इस्तेमाल बिजली की लाइनों, ट्रांसफॉर्मर और सबस्टेशन में किया जा सके।
आने वाले समय में सबस्टेशन की संख्या और क्षमता बढ़ने से भी एल्युमीनियम की मांग बढ़ सकती है। ट्रांसफॉर्मर और सबस्टेशन में इस्तेमाल होने वाले ज्यादा बिजली चालक एल्युमीनियम तारों की जरूरत बिजली के ढांचे के विस्तार के साथ बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा निर्माण और वाहन उद्योग में भी एल्युमीनियम का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
