लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर जारी है। खासकर, समाजवादी और भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा को ’सैफई सिंडिकेट’ करार देते कहा कि सपा की पिछली सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को अराजकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार में फंसा रखा था। वे उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (Uttar Pradesh Education Service Selection Commission) द्वारा चयनित 3567 शिक्षकों के नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे।
योगी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लिए बिना सपा नेतृत्व को ’सैफई सिंडिकेट’ बताया और कहा, ’’मैंने सैफई सिंडिकेट से यह भी कहा है कि हम नौकरी दे रहे हैं, आप गिनते जाइए। आदित्यनाथ ने तंज भरे अंदाज में कहा कि गिनती नहीं आती होगी तो आप कभी-कभी शिवपाल जी (सपा के वरिष्ठ नेता) के सानिध्य में बैठ जाएंगे तो वह आपको बहुत अच्छी गिनती सिखा देंगे। सपा प्रमुख ने आदित्यनाथ के अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के दावे पर हाल में तंज करते हुए कहा था कि जनवरी के बाद तो आचार संहिता लग जाएगी तो फिर वह एक लाख नौकरियां कैसे देंगे?
आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले परीक्षा कोई और देता था और नियुक्ति पत्र उसको मिल जाता था, जिसने परीक्षा का फॉर्म भी नहीं भरा होता था। उन्होंने कहा कि यह अराजकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा थी।
9 साल की सरकार में नौकरियां बांटी-योगी
मुख्यमंत्री ने एक अभ्यर्थी का उदाहरण दिया कहा कि उसने 2015-16 में एक पद के लिए आवेदन किया था और कथित तौर पर उससे आठ लाख रुपये बतौर रिश्वत मांगे गए थे। उन्होंने कहा कि बाद में भर्ती प्रक्रिया कानूनी विवादों में फंस गई और कई साल बाद पूरी हुई। उनकी सरकार ने पिछले नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी। उन्होंने घोषणा की कि अगले छह महीनों में एक लाख और लोगों को नियुक्तियां दी जाएंगी। उन्होंने बेसिक शिक्षा में ’ऑपरेशन कायाकल्प’ और माध्यमिक शिक्षा में ’ऑपरेशन अलंकार’ के तहत स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार का भी जिक्र किया। आदित्यनाथ ने नए नियुक्त शिक्षकों से कहा कि वे विद्यार्थियों को 2047 की चुनौतियों के लिए तैयार करें, जब स्कूल जाने वाली आज की पीढ़ी वयस्क होकर अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही होगी।
